नई दिल्ली: सरकार ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2022 (Economic Survey 2022) पेश किया है. केंद्रीय बजट (Union Budget 2023-24) को पेश करने से एक दिन पहले देश का आर्थिक सर्वे प्रस्तुत किया जाता है. बजट से पूर्व संसद में वित्त मंत्री देश की आर्थिक दशा की जो आधिकारिक रिपोर्ट पेश करते हैं, वह इकनॉमिक सर्वे या आर्थिक सर्वे कहलाता है. इकनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट पर एनडीटीवी से बात करते हुए सीआईआई के अध्यक्ष संजीव बजाज ने कहा कि आर्थिक सर्वे ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति के बारे में अहम तथ्य पेश किए हैं.
बजाज ने कहा कि हम चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था को और रफ्तार देने के लिए यह जरूरी है की पर्सनल इनकम टैक्स रेट में वित्त मंत्री बदलाव करें. अगर आम लोगों के हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे तो वह खर्च ज्यादा करेंगे. अर्थव्यवस्था के डिमांड में सुधार होगा और अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी बढ़ेगी.
बताते चलें कि आर्थिक सर्वेक्षण चूंकि देश की आर्थिक स्थिति का बताता है, इसलिए इसके जरिए आगामी बजट में किन क्षेत्रों पर फोकस होगा, इसका एक अनुमान लगाया जा सकता है. हालांकि, यहां बता दें कि यह सर्वे केवल सिफारिशें हैं और इन्हें लेकर कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती है. सरकार इन्हें केवल निर्देशात्मक रूप से लेती है.आर्थिक सर्वेक्षण मुख्य आर्थिक सलाहकार के साथ वित्त और आर्थिक मामलों की जानकारों की टीम तैयार करती है. इस बार मुख्य आर्थिक सलाहकार वी नागेश्नेवरन ने आर्थिक सर्वे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा है.
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