यह ख़बर 13 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित हुई थी

चीन से भारतीय दवाओं को खरीदने की मांग

खास बातें

  • ब्रिक्स समूह के देशों ब्राजील, रूस, भारत और दक्षिण अफ्रीका ने चीन से मांग की कि वह उनके मूल्य वर्धित उत्पादों की अधिकाधिक खरीदारी करे।
सान्या (चीन):

ब्रिक्स समूह के देशों ब्राजील, रूस, भारत और दक्षिण अफ्रीका ने बुधवार को चीन से मांग की कि वह उनके मूल्य वर्धित उत्पादों की अधिकाधिक खरीदारी करे। इस मांग में भारतीय औषधियों का खास तौर से उल्लेख किया गया। यह मांग चीनी द्वीप हैनान के शहर सान्या में ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक में की गई। गुरुवार को इस शहर में ब्रिक्स देशों का तीसरा शिखर सम्मेलन होने वाला है। इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मंगलवार को यहां पहुंचे। सिंह अपनी पांच दिवसीय यात्रा में कजाकिस्तान भी जाएंगे। केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा के मुताबिक चीन के वाणिज्य मंत्री चेन देमिंग ने वादा किया कि ब्रिक्स देशों से मूल्य वर्धित उत्पादों की खरीददारी को तरजीह दी जाएगी। शर्मा चीन की यात्रा पर प्रधानमंत्री के साथ गए हुए हैं। बैठक के तुरंत बाद वह संवाददाताओं से बात कर रहे थे। यदि इस वादे पर अमल होता है तो चीन और भारत के बीच चीन के पक्ष में बढ़ते व्यापार असंतुलन को कम करने में मदद मिलेगी। भारत द्विपक्षीय व्यापार घाटा को कम करना चाहता है। व्यापार मंत्रियों की बैठक में उठाए गए मुद्दों को ब्रिक्स सम्मेलन में उठाया जाएगा, जिसे मनमोहन सिंह, चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ, ब्राजील की  राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ, रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा सम्बोधित करेंगे। ब्राजील और भारत ने चीन से उसकी मुद्रा की कीमत कम करने को लेकर भी शिकायत की, जिसका द्विपक्षीय व्यापार पर नकारात्मक असर होता है। व्यापार असंतुलन चीन और भारत के द्विपक्षीय व्यापार में चिंता का एक प्रमुख विषय है। वर्ष 2010 में दोनों देशों के बीच कुल 60 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जिसमें चीन के पक्ष में 20 अरब डॉलर का असंतुलन था। यह असंतुलन इससे पिछले साल 16 अरब डॉलर का था।


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