यह ख़बर 24 मई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

केयर्न ने ONGC के रॉयल्टी दावे को किया खारिज

खास बातें

  • ओएनजीसी की राजस्थान ब्लॉक में 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, पर उसे क्षेत्र के पूरे उत्पादन पर रॉयल्टी का भुगतान करना पड़ता है।
New Delhi:

ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी ने राजस्थान क्षेत्र में उसकी भारतीय इकाई के तेल उत्पादन पर तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) द्वारा दी जाने वाली 12,600 करोड़ रुपये की रॉयल्टी की रिकवरी के दावे का विरोध किया है। हालांकि भारत के सालिसिटर जनरल ने ओएनजीसी के रुख को उचित ठहराया है। ओएनजीसी की राजस्थान ब्लॉक में 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, पर उसे क्षेत्र के पूरे उत्पादन पर रॉयल्टी का भुगतान करना पड़ता है। ओएनजीसी चाहती है कि उसकी और केयर्न इंडिया की ओर से उसके द्वारा दी जाने वाली 18,000 करोड़ रुपये की रॉयल्टी को परियोजना की लागत में शामिल किया जाए। केयर्न एनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिल गैमल ने 18 अप्रैल को मंत्रियों की समिति को भेजे पत्र में कहा है कि लाइसेंसी के रूप में रॉयल्टी का भगुतान ओएनजीसी की प्रतिबद्धता है और उसे लागत में शामिल नहीं किया जा सकता। मंत्रियों की इसी समिति को वेदांता रिसोर्सेज को की जाने वाली केयर्न इंडिया की हिस्सेदारी की बिक्री के सौदे पर फैसला करना है। गैमल ने राजस्थान क्षेत्र के लिए उत्पादन भागीदारी अनुबंध के अनुच्छेद का उल्लेख करते हुए कहा, केयर्न इंडिया सरकार या राज्य सरकार के प्रति रॉयल्टी के भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं है.. इस लागत का बोझ लाइसेंसी ओएनजीसी को उठाना होगा। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाली मंत्रियों की समिति ने इस बारे में सालिसिटर जनरल की राय मांगी थी। सालिसिटर जनरल ने उत्पादन भागीदारी अनुबंध के परिशिष्ट सी के अनुच्छेद 3.1 का हवाला देते हुए कहा है कि कांट्रैक्टर द्वारा ड्यूटी, लेवी, फीस, चार्ज या केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा लगाई गए किसी भी भी शुल्क को लागत में जोड़ा जाना चाहिए। नोट में गैमल ने कहा कि ओएनजीसी परिशिष्ट सी के अनुच्छेद 3.1.9 के आधार पर यह दावा कर रही है। पर यह उत्पादन भागीदारी करार के अनुच्छेद 16.2 से मेल नहीं खाता। अनुच्छेद 16.4 के तहत केयर्न को रॉयल्टी भुगतान की छूट मिलती है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी राजस्थान ब्लॉक की लाइसेंसी है और किसी भी खोज में उसका 30 प्रतिशत का अधिकार है। वित्त मंत्री मुखर्जी, पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी अैर विधि मंत्री वीरप्पा मोइली को लिखे पत्र में गैमल ने कहा है, यह स्पष्ट है कि लाइसेंसी के रूप में ओएनजीसी को रॉयल्टी की लागत का बोझ उठाना पड़ेगा। यदि ब्लॉक में ओएनजीसी की हिस्सेदारी नहीं भी होती, तो भी उसे लाइसेंसी के रूप में इस लागत का बोझ उठाना पड़ता।


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