खास बातें
- सीएजी की ड्राफ्ट रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज को दिए गैस के ठेके में सरकार ने नियमों की जमकर अनदेखी की और RIL ने करोड़ो रुपये कमाए।
नई दिल्ली: 2जी घोटाले के बाद अब यूपीए सरकार के लिए नया सिरदर्द तैयार है। ताज़ा मामला सीएजी की ड्राफ्ट रिपोर्ट से उठा है। इसके मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज को दिए गैस के ठेके में सरकार ने नियमों की जमकर अनदेखी की और RIL ने करोड़ों रुपये कमाए। सीएजी की ड्राफ्ट रिपोर्ट कहती है कि 2004 से 2006 के बीच रिलायंस ने यहां से गैस निकालने की कीमत को 4 गुना बढ़ा दिया। सरकार की ओर से पहले दिए टेंडर में हर रोज़ 40 यूनिट गैस उत्पादन की कीमत 2.47 बिलियन डॉलर रखी गई। 2006 में कंपनी ने नया प्रस्ताव दिया जिसके तहत गैस उत्पादन को दोगुना यानी 80 यूनिट करने के लिए सरकार ने उसके साथ तकरीबन चार गुना यानी 8.84 बिलियन डॉलर का करार किया। साफ है कि आम आदमी की जेब से पैसा रिलायंस के पास गया। सीएजी के खुलासे के बाद विपक्ष इसे सरासर भ्रष्टाचार का मामला बता रहा है। सीपीएम का आरोप है कि इस मामले में 2006 में उसने लगातार प्रधानमंत्री और पेट्रोलियम मंत्री को कुल 7 चिट्ठियां लिखीं लेकिन सरकार बात टालती रही। ज़ाहिर है पेट्रोलियम मंत्री के साथ-साथ उस वक्त के वित्तमंत्री चिदंबरम और प्रधानमंत्री भी अब विपक्ष के निशाने पर होंगे क्योंकि सीएजी की रिपोर्ट आखिरकार पीएसी के पास जानी है।