खास बातें
- प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने 31 मार्च को समाप्त हो रहे मौजूदा वित्तवर्ष के दौरान देश की आर्थिक विकास दर 7.1 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने 31 मार्च को समाप्त हो रहे मौजूदा वित्तवर्ष के दौरान देश की आर्थिक विकास दर 7.1 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है, जो इस माह के शुरुआती आकलन 6.9 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है।
परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने बुधवार को कहा कि कृषि एवं निर्माण क्षेत्र में भी वृद्धि दर इस माह की शुरुआत में पेश किए गए केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के आकलन से ऊंची रहने की संभावना है। 2011-12 की आर्थिक समीक्षा में परिषद ने कहा है कि कृषि क्षेत्र में विकास दर 2.5 प्रतिशत के पूर्व आकलन की तुलना में तीन प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसी तरह विनिर्माण क्षेत्र में 3.9 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है, जबकि निर्माण क्षेत्र में 6.2 प्रतिशत तक विस्तार हो सकता है।
संवाददाता सम्मेलन में रंगराजन ने कहा, वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में विनिर्माण एवं निर्माण क्षेत्र में मंदी का दौर देखा गया। चौथी तिमाही में इसमें सुधार हो सकता है। सेवा क्षेत्र में भी वृद्धि जारी रहेगी और यह वित्तवर्ष के आखिर में 9.4 प्रतिशत रह सकता है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के विकास दर में हालांकि बजट लक्ष्य के मुकाबले थोड़ी कमी आ सकती है, जिसके नौ प्रतिशत के आसपास रहने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
महंगाई दर के बारे में परिषद के अध्यक्ष रंगराजन ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष के आखिर तक यह गिरकर 6.5 प्रतिशत रह सकता है। उन्होंने कहा, "महंगाई दर में पिछले वर्ष नवंबर में गिरावट आने की शुरुआत हुई थी और इस साल जनवरी में इसमें भारी गिरावट देखी गई। मार्च 2012 के आखिर तक यह 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीतियों तथा अन्य सार्वजनिक नीतियों का इस पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है।"