यह ख़बर 23 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

कड़े कदमों से भारत का व्यापार प्रभावित होगा : ब्लैकबेरी

खास बातें

  • भारत ने सुरक्षा के मद्देनजर आरआईएम की इंटरप्राइज सेवा या कूट ईमेल्स तक पहुंच सुलभ कराने के लिए कई बार समय सीमा निर्धारित की, लेकिन कम्पनी उन समय सीमाओं पर खरी नहीं उतर पाई है।
टोरंटो:

ब्लैकबेरी मोबाइल फोन बनाने वाली कम्पनी, रिसर्च इन मोशन (आरआईएम) ने मंगलवार को कहा कि नई दिल्ली द्वारा उठाए जाने वाले किसी भी कड़े कदम से भारतीय व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। ज्ञात हो कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर आरआईएम की इंटरप्राइज सेवा या कूट ईमेल्स तक पहुंच सुलभ कराने के लिए कई बार समय सीमा निर्धारित की, लेकिन कम्पनी उन समय सीमाओं पर खरी नहीं उतर पाई है। आरआईएम, भारतीय अधिकारियों को पहले ही जवरी से अपनी उपभोक्ता सेवाओं तक पहुंच सुलभ करा चुकी है, लेकिन वह अपने इंटरप्राइज ईमेल्स के मुद्दे पर झुकना नहीं चाहती। अपने उद्यमी उपभोक्ताओं को भेजी एक टिप्पणी में ब्लैकबेरी उत्पादक ने कहा है कि कम्पनी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता का पूरा समर्थन एवं स्वागत करती है। लेकिन इसके साथ ही आरआईएम ने कहा है कि कूट भाषा आज की दुनिया में बाजार में बने रहने के लिए महत्वपूर्ण है और भारतीय अधिकारियों ने कम्पनी के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न बैठकों में इसके महत्व को स्वीकार किया है। आरआईएम ने कहा है कि इस पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने से देश के आर्थिक विकास और आउटसोर्सिग उद्योग पर असर पड़ेगा। आरआईएम ने कहा है कि कम्पनी किसी भी नीतिगत बदलाव के लिए चर्चा करने को तैयार है। लेकिन चूंकि अन्य प्रतिस्पर्धी कम्पनियां भी भारत में कूट भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं, लिहाजा उन्हें भी समीक्षा के दायरे में लाया जाना चाहिए। आरआईएम ने कहा है कि कूट भाषा का इस्तेमाल करने वाली प्रतिस्पर्धी कम्पनियों ने इस स्थिति का लाभ डठाने की कोशिश की है, क्योंकि भारतीय प्रशासन अपना ध्यान आरआईएम की इंटरप्राइज सेवा पर केंद्रित किए हुए है। आरआईएम के अनुसार, भारत में कूट भाषा का इस्तेमाल करने वाली कम्पनियों में नोकिया, गूगल, एप्पल, हेवलेट-पैकार्ड, माइक्रोसॉफ्ट, और सिस्को शामिल हैं। अपनी टिप्पणी में आरआईएम ने भारत में अपनी उपभोक्ता सेवा तक पहुंच सुलभ कराने के लिए 31 जनवरी की समय सीमा का तो जिक्र किया है। लेकिन उसने अपनी इंटरप्राइज सर्विस तक पहुंच सुलभ कराने के लिए भारत द्वारा निर्धारित किसी भी समय सीमा का जिक्र नहीं किया है।


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