खास बातें
- बीबीसी ने कहा कि उसे कई व्यावसायिक पक्षों ने वैकल्पिक वित्त पोषण का सुझाव दिया लेकिन अगर विकल्प नहीं मिला तो यह सेवा मार्च'12 में बंद कर दी जाएगी।
लंदन: हिंदी सेवा को बंद करने के खिलाफ चले व्यापक विरोध और हस्ताक्षर अभियान के बाद बीबीसी ने कहा कि वह अगले एक साल तक के लिए बीबीसी की शाम की एक घंटे की सेवा को बनाए रखेगी और इसके वित्त पोषण के लिए विकल्पों की तलाश करेगी। कई प्रख्यात पत्रकारों और लोगों ने खर्च घटाने के लिए बीबीसी की हिंदी सेवा को बंद करने के फैसले का जमकर विरोध किया था। यह सेवा 31 मार्च को बंद होनी थी लेकिन उसे एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने कहा है कि उसे कई व्यावसायिक पक्षों ने सेवा के लिए वैकल्पिक वित्त पोषण का सुझाव दिया था। लेकिन अगर कोई विकल्प नहीं मिला तो यह सेवा मार्च 2012 में बंद कर दी जाएगी। इस अभियान को अरुंधति राय, विक्रम सेठ और मार्क टुली ने समर्थन दिया था। इन लोगों ने कहा था कि बीबीसी हिंदी सेवा के एक करोड़ श्रोता हैं जिसमें अधिकतर ग्रामीण इलाकों से ताल्लुक रखते हैं। बीबीसी विश्व सेवा की शुरुआत वर्ष 1940 में हुई थी और जब भारत में मीडिया पर सरकारी नियंत्रण था, उस समय इसे जबर्दस्त लोकप्रियता मिली।