यह ख़बर 28 फ़रवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

देशव्यापी हड़ताल का मिलाजुला असर, बैंक-परिवहन प्रभावित

खास बातें

  • देश के 11 केंद्रीय व्यापार संघों की 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल मंगलवार को शांतिपूर्ण रही और देशभर में हड़ताल का मिलाजुला असर देखा गया।
नई दिल्ली:

देश के 11 केंद्रीय व्यापार संघों की 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल मंगलवार को शांतिपूर्ण रही और देशभर में हड़ताल का मिलाजुला असर देखा गया। हड़ताल की वजह से हालांकि, देश के कई हिस्सों में बैंक एवं परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई।

ठेके पर मजदूरी खत्म करने, न्यूनतम मजदूरी कानून में संशोधन, ग्रेच्युटी में वृद्धि और मजदूर संगठनों का पंजीकरण 45 दिन के भीतर अनिवार्य करने की मांग लेकर हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के करीब आठ लाख कर्मचारी शामिल हुए।

संघों की मांग में सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष का गठन, बुनियादी श्रम कानूनों को लागू करने और कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सभी बड़े व्यापार संघों और पांच हजार असम्बद्ध संघों से अपनी हड़ताल स्थगित करने की अपील की थी लेकिन व्यापार संघों ने यह कहते हुए प्रधानमंत्री की अपील खारिज कर दी कि देश की आजादी के इतिहास के सबसे बड़े हड़ताल को स्थगित करने की अपील मात्र 48 घंटे पहले की गई है।

हड़ताल का सर्वाधिक प्रभाव सरकारी बैंकों के कामकाज और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ा। देश के ज्यादातर सरकारी बैंक बंद रहे। यहां तक कि भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मचारी भी सरकार की श्रमिक नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए।

अधिकारियों ने बताया कि हड़ताल की वजह से उड़ानें ज्यादा प्रभावित नहीं हुईं। हवाईअड्डों पर स्थिति सामान्य बनी रही।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सड़कों पर कुछ ही वाहन दिखे। ऑटो-रिक्शा और टैक्सी सड़कों से गायब रहे। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों में रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि सड़कों पर कम ही बसें उतरीं, जिससे यात्री शहर में कई स्थानों पर फंसे रहे।

देश की वित्तीय राजधानी मुम्बई में बैंकों के कर्मचारियों, बीमा कम्पनियों, केंद्र सरकार तथा स्थानीय निकायों के कर्मचारियों के साथ-साथ कई निजी औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों ने भी भाग लिया।

हड़ताल का व्यापक असर हरियाणा में भी देखने को मिला। प्रदेश के यमुनानगर जिले में हड़ताली परिवहन कर्मचारियों ने कई बसों के टायरों की हवा निकाल दी।

पड़ोसी राज्य पंजाब में हालांकि हड़ताल का असर कम देखने को मिला। देश के बड़े औद्योगिक शहरों में शामिल लुधियाना की गलियों में अन्य दिनों की तुलना में कम चहल-पहल देखी गई।

केरल में बंद का व्यापक असर रहा। सड़कों पर बसें, ऑटो नहीं उतरे। सभी वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाइयां भी बंद रहीं। स्कूल, कॉलेज भी बंद रहे।

उत्तर प्रदेश में हड़ताल का आंशिक असर देखा गया। राजधानी के अलावा इलाहाबाद, वाराणसी, आगरा और कानपुर में भी जनजीवन प्रभावित हुआ।

बिहार में भी हड़ताल के कारण आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। सड़कों से ऑटो रिक्शा नदारद रहे। बैंकों में कामकाज ठप्प होने के कारण वित्तीय सेवाओं पर भी इसका असर पड़ा।

हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, कर्नाटक तथा ओडिशा में हड़ताल का असर आम जनजीवन पर भी पड़ा।

पश्चिम बंगाल में हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। सड़कें सूनी रहीं और रेल सेवाएं भी जगह-जगह बाधित की गईं। उड़ानों पर हालांकि, इसका असर नहीं देखा गया। कोलकाता में निजी बसों के साथ-साथ सरकारी बसें भी सड़कों से नदारद रहीं, जिससे लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मेट्रो रेल सेवा हालांकि सामान्य रही।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हड़ताल को असफल बताया और कहा कि इसे आम आदमी का समर्थन नहीं मिला।

राज्य सचिवालय राइटर्स बिल्डिंग में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "प्रदेश में कोई हड़ताल नहीं है, सब स्थान खुले हुए हैं। रेलगाड़ियां, बसें, टैक्सियां सभी चल रही हैं। सभी उड़ानें अपने निर्धारित समय के अनुसार चली हैं। दफ्तरों में लगभग सभी सरकारी कर्मचारी उपस्थित रहे हैं।"

वहीं, देशव्यापी हड़ताल का पश्चिम बंगाल में पड़े प्रभाव का स्वागत करते हुए भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) ने कहा कि हड़ताल की व्यापक सफलता से इनकार कर मुख्यमंत्री ने झूठ बोला है।

सीटू के प्रदेश अध्यक्ष श्यामल चक्रवर्ती ने कहा, "ममता झूठी हैं। वह जनता से झूठ बोल रही हैं। यदि ममता सच्ची होतीं तो वह राइटर्स बिल्डिंग में सरकारी कर्मचारियों की तस्वीरें लेने के लिए मीडियाकर्मियों को इजाजत दी होतीं। हम इस बड़ी सफलता के लिए बंगाल की जनता को धन्यवाद देते हैं।"

उधर, भारतीय उद्योग जगत ने हड़ताल को दुर्भाग्यपूर्ण और असमय बताया। उद्योग जगत का कहना है कि आर्थिक मंदी और व्यापार में गिरावट के समय ऐसी हड़ताल की आवश्यकता नहीं थी।

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एल एंड टी अवसंरचना के मुख्य वित्तीय कार्यकारी अधिकारी सुनीत के.  माहेश्वरी ने बताया, "हड़ताल पूरी तरह से गलत समय पर की गई है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अर्थव्यवस्था जब बुरे दौर से गुजर रही है तो ऐसे में हड़ताल करने का मैं कोई औचित्य नहीं देखता।"