खास बातें
- किंगफिशर को कर्ज दे रखे बैंकों ने संकटग्रस्त विमानन कंपनी पर बकाया 7,500 करोड़ रुपये कर्ज की वसूली करने का फैसला कर लिया है। वेतन भुगतान को लेकर कर्मचारियों के बीच अशांति के बाद 1 अक्टूबर से ही कंपनी का परिचालन ठप है।
मुंबई: किंगफिशर को कर्ज दे रखे बैंकों ने संकटग्रस्त विमानन कंपनी पर बकाया 7,500 करोड़ रुपये कर्ज की वसूली करने का फैसला कर लिया है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक उच्च अधिकारी ने यह जानकारी दी।
कंपनी प्रतिनिधियों के साथ मंगलवार को दो घंटे चली बैठक के बाद एसबीआई के उप प्रबंध निदेशक (मिड कॉरपोरेट) श्यामल आचार्य ने संवाददाताओं को बताया, हमने किंगफिशर को दिए गए ऋणों की वसूली की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय किया है।
हालांकि, प्रत्येक बैंक का बोर्ड भावी कार्रवाई पर निर्णय करेगा। बैठक में एसबीआई की अगुवाई में पांच बैंकों के अधिकारियों और कंपनी के सीईओ संजय अग्रवाल व यूबी समूह के अध्यक्ष व सीएफओ (मुख्य वित्त अधिकारी) रवि नेदुंगडी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बाद में नेदुंगडी ने बताया, हम बैंकों के समूह से औपचारिक सूचना मिलने के बाद इस बारे में कोई बयान देंगे।
यह निर्णय ऐसे समय में किया गया है, जब किंगफिशर के चेयरमैन विजय माल्या कंपनी के कर्मचारियों को उनकी 11 महीने की बकाया तनख्वाह देने का वादा कर चुके हैं और साथ ही उन्होंने आगामी ग्रीष्मकालीन सारणी के साथ परिचालन दोबारा शुरू करने का आश्वासन दिया है। आचार्य ने कहा, विमानन कंपनी के प्रबंधन द्वारा परिचालन दोबारा शुरू करने के संबंध में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है और बैंकों को लगता है कि कंपनी को पर्याप्त समय दिया जा चुका है।
उल्लेखनीय है कि संकटग्रस्त विमानन कंपनी पर बैंकों का 6,360 करोड़ रुपये का ऋण बाकी है। वहीं ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज को शामिल करने पर कुल बकाया 7,500 करोड़ रुपये से अधिक का है। बैंकों के समूह के अगुवा एसबीआई का किंगफिशर में 1,600 करोड़ रुपये ऋण लगा है, वहीं पीएनबी का 800 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक का 800 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ इंडिया का 650 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा का 550 करोड़ रुपये लगा है।
वेतन भुगतान को लेकर कर्मचारियों के बीच अशांति के बाद 1 अक्टूबर से ही कंपनी का परिचालन ठप है। कंपनी ने पिछले साल मई से कंपनी को वेतन नहीं दिया है। किंगफिशर को यूनाइटेड बैंक ने 430 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक ने 410 करोड़ रुपये, यूको बैंक ने 320 करोड़ रुपये, कॉरपोरेशन बैंक ने 310 करोड़ रुपये, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर ने 150 करोड़ रुपये, इंडियन ओवरसीज बैंक ने 140 करोड़ रुपये, फेडरल बैंक ने 90 करोड़ रुपये, पंजाब एंड सिंध बैंक ने 60 करोड़ रुपये और एक्सिस बैंक ने 50 करोड़ रुपये का ऋण दे रखा है।