खास बातें
- इसके धन का इस्तेमाल अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस तथा भारत के लिए परमाणु हथियार के कलपुर्जे बनाने में किया जा रहा है।
मेलबर्न: ऑस्ट्रेलियाई सरकार का 74 अरब डालर का फ्यूचर फंड एक रपट के बाद जांच के घेरे में आ गया है जिसमें कहा गया है कि इसके धन का इस्तेमाल अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस तथा भारत के लिए परमाणु हथियार के कलपुर्जे बनाने में किया जा रहा है। समाचार पत्र 'द एज' ने सूचना की आजादी कानून के तहत हासिल जानकारी के हवाले से यह रपट प्रकाशित की है। इसमें कहा गया है कि 13.54 करोड़ डॉलर की राशि उन 15 कंपनियों में लगाई गई है जो अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस तथा भारत के लिए परमाणु हथियारों की डिजाइन, निर्माण तथा रखरखाव का काम करती हैं। इसके अनुसार लगभग 38 लाख डॉलर लार्सन एंड टुब्रो में लगाए गए हैं। मुंबई की यह कंपनी भारत के लिए परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों का बेड़ा बना रही है। इसने देश की परमाणु मिसाइलों के लिए प्रक्षेपण प्रणाली के परीक्षण में मदद की थी। एलएंडटी के प्रवक्ता ने इस बारे में टिप्पणी से इनकार किया। रपट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत के लिए परमाणु हथियारों के उत्पदन में निवेश विशेषकर विवादास्पद है क्योंकि उसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। रपट में परमाणु हथियारों की समाप्ति के अंतरराष्ट्रीय अभियान (आईसीएएनडब्ल्यू) के विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि निवेश फंड की नीतियों के खिलाफ है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में परमाणु हथियारों का विमिनर्माण अवैध है। संगठन के टिम राइट ने अखबार से कहा कि फ्यूचर फंड की नीति है कि वह उन गतिविधियों में पैसा नहीं लगाएगा जो ऑस्ट्रेलिया में अवैध हैं। निसंदेह रूप से स्पष्ट है कि ये कंपनियां जो कर रही हैं वह ऑस्ट्रेलिया में अवैध होगा।