खास बातें
- कच्चे तेल के उत्पादन की 'गलत और बढ़ाचढ़ा कर' जानकारी देने पर फटकार
- कच्चे तेल के उत्पादन के 'माप और पैमाइश' में भी दुर्बलता है
- कंपनी को कच्चे तेल की हर स्तर पर सही माप करने की प्रणाली लगानी चाहिए
नई दिल्ली: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने ओएनजीसी को कच्चे तेल के उत्पादन की 'गलत और बढ़ाचढ़ा कर' जानकारी देने पर फटकारा और कंडेंसेटे, बेसिक सेंडिमेंट और पानी इत्यादि को कच्चे तेल के उत्पादन में शामिल नहीं करने की संस्तुति की.
सोमवार को संसद के पटल पर रखी अपनी रिपोर्ट में कैग ने कहा, "कच्चे तेल के उत्पादन की गलत और बढ़ाचढ़ा कर जानकारी देने से कंपनी के प्रदर्शन की गलत जानकारी मिली है. इस कारण कंपनी पर साल 2012 से 2015 के दौरान 18,787.43 करोड़ रुपये सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ पड़ा."
इसमें कहा गया कि कच्चे तेल के उत्पादन के 'माप और पैमाइश' में भी दुर्बलता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ओएनजीसी ऑपरेशन के पश्चिमी तट के उत्पादन के बारे में दी गई जानकारी और बिक्री की गई वास्तविक मात्रा में काफी फर्क है. सीएजी ने कहा कि इस अंतर की जांच की जानी चाहिए और सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए.
इसके अलावा इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तटीय क्षेत्रों में अधिक उत्पादन दिखाने के बाद कंपनी ने कच्चे तेल की चोरी और बर्बादी या फिर तेल की खराब मात्रा जैसे बहाने बनाए, ताकि कंपनी के शेयरों पर असर न हो. उन्होंने कहा, "कंपनी को कच्चे तेल की हर स्तर पर सही माप करने की प्रणाली लगानी चाहिए, ताकि उनके माप की सटीकता सुनिश्चित हो."
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)