नई दिल्ली:
विदेशों में काला धन रखने वालों के नाम उजागर करने की बढ़ती मांग के बीच उद्योग मंडल एसोचैम ने आज कहा कि सरकार को इस तरह के लोगों के नाम का खुलासा अपरिपक्व ढंग से नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे इस अपराध के खिलाफ लड़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
एसोचैम ने एक बयान में कहा है, 'भारतीय नागरिकों व कंपनियों के लिए दोहरा कराधान बचाव संधियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे वे दो बार कर भुगतान से बच सकते हैं। कथित काला धन रखने वालों के नामों के खुलासे से भले ही सुर्खियां बन जाएं, लेकिन इससे काले धन के खिलाफ भारत की लड़ाई निश्चित रूप से कमजोर होगी। इसके अलावा दोहरा कराधान बचाव संधि के उल्लंघन से भारत की साख भी प्रभावित होगी।'
एसोचैम ने कहा है, 'अगर नाम सार्वजनिक किए जाते हैं और वे लाभ अंतत: दोषी नहीं पाये जाते तो उन व्यक्तियों तथा इकाइयों की साख को बहुत नुकसान होगा।'
संगठन ने विभिन्न राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे विदेशों में काला धन रखने वाले लोगों या फर्मों से जुड़ी वर्गीकृत सूचनाओं के खुलासे के लिए सरकार पर दबाव बनाते समय उचित कारण पर ध्यान दें।
इसके अनुसार, 'बेहतर तरीका यही होगा कि प्रणालीगत बदलाव लाए जाएं ताकि काले धन पर प्रीमियम कम होता जाए।' वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि अदालत में मामले दर्ज होने के बाद इन नामों का खुलासा कर दिया जाएगा।