नई दिल्ली:
वित्तमंत्री अरुण जेटली आज 2015-16 का बजट पेश करने जा रहे हैं, और वह संसद भवन पहुंच गए हैं। यह नरेंद्र मोदी सरकार का पहला पूर्ण बजट है, और पूरे देश की निगाहें इसी पर टिकी हुई हैं।
बहुतों का मानना है कि यह बजट '90 के दशक की शुरुआत में आर्थिक उदारीकरण का दौर शुरू होने के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण बजट होगा। जेटली के इस बजट से आम आदमी के अलावा न सिर्फ बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे देश की आबादी के बहुत बड़े हिस्से को उम्मीदें हैं, बल्कि वित्तीय बाज़ारों को भी काफी आशाएं हैं, जो कई दिन से बड़े-बड़े सुधारों की उम्मीद में हैं। इसी के परिणामस्वरूप बीएसई सेंसेक्स हालिया दिनों में दुनिया के सभी बाजारों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स साबित हुआ है।
शनिवार सुबह भी विशेष कारोबारी सत्र के दौरान शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स लगभग 250 अंक उछला, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार, अगर बजट में पर्याप्त विकासोन्मुखी कदम नहीं उठाए गए, तो बिकवाली भी 6-8 प्रतिशत हो सकती है।
ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त मंत्री टैक्स स्लैब बढ़ा सकते हैं या बचत उत्पादों में निवेश की सीमा में बढ़ोतरी कर सकते हैं। साथ ही बजट में पीएम मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने के उपायों की घोषणा भी की जा सकती है।
माना जा रहा है कि जेटली राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे और राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.6 प्रतिशत पर रखेंगे। चालू वित्त वर्ष में यह 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आयकरदाताओं को रियायत के अलावा वित्त मंत्री कंपनियों के निवेश को बढ़ाने के उपायों की घोषणा कर सकते हैं।
जेटली ने जुलाई, 2014 में अपने पहले बजट में व्यक्तिगत आयकरदाताओं को राहत पहुंचाने के रुख के बारे में कहा था। पिछले साल उन्होंने व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा 50,000 रुपये बढ़ाकर 2.50 लाख की थी। इसके अलावा बचत पर आयकर छूट की सीमा भी 50,000 रुपये बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये की थी।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इस बार जेटली बजट में इनमें से सिर्फ एक विकल्प चुनेंगे, क्योंकि वह सार्वजनिक खर्च बढ़ाने के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना चाहते हैं। इसके अलावा वह स्वास्थ्य बीमा में भी कर छूट की सीमा बढ़ा सकते हैं। आम लोगों के साथ-साथ देश के उद्योग जगत को भी आम बजट से काफी उम्मीदे हैं।
बजट की वजह से शनिवार होने के बावजूद शेयर बाज़ार खुला रहने वाला है। रियल स्टेट सेक्टर में विदेशी पूंजी निवेश की सीमा क्या होगी इस पर उद्योग जगत की निगाहें टिकी हैं। इससे पहले शुक्रवार को सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया, जिसमें साल 2015-16 में विकास दर 8 फ़ीसदी से ज़्यादा रहने का अनुमान जताया गया।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि सुधारों के आगे बढ़ने, तेल कीमतों में गिरावट, मुद्रास्फीति में नरमी, नीतिगत ब्याज दर में कमी और 2015-16 में मॉनसून सामान्य रहने से विकास में गति मिलेगी।
(इनपुट एजेंसियों से भी)