खास बातें
- निर्यात कारोबार के मामले में नये वित्त वर्ष की शुरुआत भी धमाकेदार रही, लेकिन आगामी महीनों में इस गति को बनाये रखने की चुनौती खड़ी है।
New Delhi: निर्यात कारोबार के मामले में नये वित्त वर्ष की शुरुआत भी धमाकेदार रही, लेकिन आगामी महीनों में इस गति को बनाये रखने की चुनौती खड़ी है। अप्रैल महीने में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले निर्यात कारोबार 34.4 प्रतिशत बढ़कर 23.9 अरब डॉलर का रहा। हालांकि, वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने कहा निर्यातकों के आने वाले गर्मियों के महीने आसान नहीं होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अप्रैल का रुझान बना रहेगा लेकिन आगे देखते हैं कहां पहुंचते हैं। अप्रैल महीने में निर्यात में जहां 34.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई वहीं आयात कारोबार पिछले साल की तुलना में 14.1 प्रतिशत बढ़कर 32.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस लिहाज से अप्रैल 2011 में निर्यात के मुकाबले अधिक आयात से 8.9 अरब डालर का व्यापार घाटा रहा। वित्त वर्ष 2010-11 में देश से कुल 246 अरब डालर का निर्यात किया गया। एक साल पहले की तुलना में पूरे वर्ष का निर्यात 37.55 प्रतिशत अधिक रहा। मार्च 2011 में निर्यात में 44 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई। इस लिहाज से अप्रैल 2011 में हासिल 34 प्रतिशत की वृद्धि कुछ कम है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में सबसे ज्यादा 109 प्रतिशत की वृद्धि इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात में दर्ज की गई। इनका निर्यात 6.8 अरब डॉलर का हुआ। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 53 प्रतिशत बढ़कर 4.3 अरब डॉलर और रत्न एवं आभूषणों का निर्यात 39 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। रेडीमेड गार्मेंट का निर्यात 12.7 प्रतिशत बढ़कर एक अरब डालर से कुछ अधिक रहा। हालांकि, लौह अयस्क, फल और सब्जियां, समुद्री उत्पाद और तंबाकू के निर्यात में कुछ गिरावट दर्ज की गई। वाणिज्य सचिव ने कहा कि आमतौर पर निर्यात शिपमेंट वर्ष के अंतिम तिमाही में जोर पकड़ती हैं, इस लिहाज से अप्रैल में कुछ सुस्ती रहना लाजिमी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यूरोप में अभी भी अनिश्चितता बने रहने और अमेरिका अर्थव्यवस्था के बारे में उत्साहवर्धक समाचार नहीं आने से चिंता बरकरार है। यूरोप के बारे में उन्होंने कहा हर कोई चिंतित है। इन देशों में रिण पुनर्गठन प्रक्रिया के चलते कुछ अन्य देशों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा है। जब तक स्पष्टता नहीं आती है तब तक हम सभी कुछ अनिश्चितता में रहेंगे। पेट्रोलियम उत्पादों का आयात सर्वाधिक रहा है। इसमें 7.7 प्रतिशत वृद्धि के साथ 10.2 अरब डॉलर का आयात हुआ। सोना और चांदी में 60 प्रतिशत, इलेक्ट्रोनिक सामान में 36 प्रतिशत और कीमती पत्थरों तथा अन्य सामान में 19 प्रतिशत आयात वृद्धि दर्ज की गई। निर्यातक संगठन फियो ने कहा है कि जून तक निर्यात आंकड़े बेहतर रह सकते हैं लेकिन उसके बाद शुल्क पात्रता पासबुक योजना (डीईपीबी) वापस होने से निर्यात पर असर पड़ सकता है।