खास बातें
- प्रमुख प्रौद्योगिकी कम्पनी एप्पल के कैंसर पीड़ित प्रमुख स्टीव जॉब्स के बिगड़ते स्वास्थ्य की खबर से कम्पनी के भविष्य को लेकर अटकलबाजियां शुरू हो गईं।
टोरंटो: दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी कम्पनी एप्पल के कैंसर से पीड़ित प्रमुख स्टीव जॉब्स के बिगड़ते स्वास्थ्य की खबरों से कम्पनी के भविष्य को लेकर अटकलबाजियां शुरू हो गई हैं। जॉब्स एप्पल के सह-संस्थापक है और कम्पनी की रणनीतियों और इसके उत्पादों पर उनकी सोच का गहरा असर माना जाता है। खबरों के मुताबिक 55 वर्षीय जॉब्स 17 जनवरी से कैलीफोर्निया में पालो अल्टो स्थित स्टेनफोर्ड कैंसर केंद्र में भर्ती हैं। उनके स्वास्थ्य को देखते हुए कहा जा रहा है कि वह छह सप्ताह से ज्यादा जीवित नहीं रहेंगे। इन खबरों का एप्पल की शेयर कीमतों पर खास असर नहीं पड़ा है लेकिन जानकारों का कहना है कि सह-संस्थापक के बिना एप्पल की राह आसान नहीं होगी जो कि कम्पनी के अद्वितीय उत्पादों के पर्याय बन चुके हैं। 'आईकॉन स्टीव जॉब्स: व्यापारिक इतिहास का दूसरा सबसे महान काम' किताब के लेखक जेफ्री यंग ने कहा कि जॉब्स की बीमारी का एप्पल पर गहरा असर पड़ेगा। स्थानीय टीवी चैनल सीटीवी से बातचीत में यंग ने कहा, "वे उसी तरह की चुनौती का सामना कर रहे है जैसी कि 1980 से 1990 के दशक में विंडोज ने मैकिंटोश सामने पेश की थी। तब विंडोज ने उपयोगकर्ताओं को एक प्लैटफॉर्म उपलब्ध कराया था और बाकी सब कम्पनियां उस प्लैटफॉर्म पर आधारित सेवाएं मुहैया कराती थीं।" यंग ने कहा कि वह नहीं कह सकते कि जॉब्स एप्पल का नेतृत्व करने दोबारा नहीं लौटेंगे लेकिन उनके जाने से कम्पनी पर कम्पनी पर काफी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि छोटी अवधि में इससे कम्पनी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कम्पनी अपने उत्पाद बनाती रहेगी और उन्हें संचालित करती रहेगी। मुझे लगता है कि कम्पनी की वास्तविक समस्या कुछ समय बाद नजर आएगी क्योंकि इसे गूगल और एंड्रायड से चुनौती मिलेगी।