यह ख़बर 30 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, निवेश आकर्षित करती रहेगी : शर्मा

खास बातें

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है तथा देश में विदेशी निवेश का प्रवाह बना रहेगा।
नई दिल्ली:

कर कानूनों में प्रस्तावित बदलावों को लेकर चिंता को खारिज करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है तथा देश में विदेशी निवेश का प्रवाह बना रहेगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या सामान्य कर परिवर्जन निवारक नियम (गार) के लागू होने के बाद विदेशी निवेश प्रभावित होगा, शर्मा ने कहा, ‘‘निवेश और कराधान दो अलग-अलग मुद्दे हैं।’’ मंत्री ने कहा, ‘‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए हमारी नीति टिकाऊ और प्रगतिशील है। हाल के समय में इसमें बदलाव हुए हैं, जिसे निवेशकों ने अच्छा माना है।’’ वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने 2012-13 के बजट में विदेशी निवेशकों की कर अपवंचना को रोकने के लिए गार को लागू करने का प्रस्ताव किया है। संस्थागत निवेशकों ने इस प्रस्ताव की आलोचना की है। उनका मानना है कि इससे देश में निवेश प्रभावित होगा।

शर्मा ने देश में एफडीआई आकर्षित करने के लिए सरकार द्वारा की जा रही पहल का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘कुछ कदम जो क्रियान्वयन के स्तर पर हैं उनमें दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी) और राष्ट्रीय विनिर्माण निवेश क्षेत्र (एनएमआईजेड) शामिल हैं।
 
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा, ‘‘इससे हमारे विदेशी भागीदारों की रुचि बनी हुई है। हमें उम्मीद है कि ज्यादातर विकसित देश जो हमारे आर्थिक भागीदार हैं, प्रौद्योगिकी में निवेश करेंगे और साथ ही भारतीय उद्योग के साथ भागीदारी करेंगे।’’ वैश्विक संकट के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने स्वीकार किया कि उनका कुछ असर होगा, पर भारतीय अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि वह इसे झेल सकती है।

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शर्मा ने कहा, ‘‘यदि हम अपनी अर्थव्यवस्था को देखें, तो हम अंतरराष्ट्रीय संकट विशेषकर यूरो संकट और तेल की ऊंची कीमतों से प्रभावित होते हैं। इससे निर्यात और आयात पर असर पड़ता है, जिससे कुल मिलाकर चालू खाता प्रभावित होता है पर वास्तव में देखा जाए, तो हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत है।’’ देश के कुल 489 अरब डॉलर के आयात बिल में से 44 फीसदी हिस्सा कच्चे तेल और सोने का है। वहीं निर्यात बीच में ही प्रभावित होता दिख रहा है। वित्त वर्ष 2011-12 में व्यापार घाटा अब तक के ऊंचे स्तर 185 अरब डॉलर पर है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती है।