यह ख़बर 26 नवंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

बैंकों को सोने की पुनर्खरीद की अनुमति से घट सकता है आयात : एसबीआई

खास बातें

  • एसबीआई ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक को बैंकों पर लगी सोने की पुनर्खरीद की पाबंदी पर फिर से विचार करना चाहिए।
मुंबई:

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक को बैंकों पर लगी सोने की पुनर्खरीद की पाबंदी पर फिर से विचार करना चाहिए। एसबीआई के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने कहा कि इस तरह के कदम से प्रणाली में तरलता की स्थिति सुधरेगी, सोने की आपूर्ति बढ़ेगी और अंतत: इससे इस पीली धातु का आयात घटेगा।

बैंकों को सोने सहित जिंस बाजारों में कारोबार की अनुमति नहीं है। नियामक और सरकार का मानना है कि इसमें उनके प्रवेश से महंगाई बढ़ सकती है। चौधरी ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंध से देश में सोने की होल्डिंग की तरलता प्रभावित हो रही है।

एसबीआई के चेयरमैन ने सोने के आयात पर परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा, आज सभी बैंक सोना बेचते हैं, लेकिन रिजर्व बैंक उन्हें अपना ही सोना खरीदने की अनुमति नहीं देता। उदाहरण के लिए यदि किसी ने मेरे बैंक से सोना खरीदा है और वह व्यक्ति उसकी सील खोले बिना उसे वापस लेकर आता है तो मैं उसे वापस नहीं खरीद सकता। चौधरी ने इस मौके मौजूद रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण से सवाल करते हुए कहा, क्या आपको नहीं लगता कि इससे देश में सोने के स्टॉक की तरलता (यानी उसको बाजार में भुनाने की सुविधा) प्रभावित होती है। इस पर गोकर्ण ने जवाब दिया कि बी के यू राव समिति की इस बारे में रिपोर्ट आने के बाद रिजर्व बैंक इस पर विचार करेगा।

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विशेषज्ञों ने सोने की बढ़ती मांग, ऊंची कीमत तथा आयात में बढ़ोतरी के लिए सर्राफा कारोबारियों और अन्य द्वारा इसकी जमाखोरी को जिम्मेदार बताया।