खास बातें
- हवाई अड्डा आर्थिक विनियामक प्राधिकरण ने इस हवाई अड्डे का परिचालन करने वाली कंपनी को सुविधाओं से जुड़े शुल्कों में 346 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति देने का निर्णय किया।
नई दिल्ली: दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरना अब और महंगा हो सकता है। हवाई अड्डा आर्थिक विनियामक प्राधिकरण ने देश के इस प्रमुख हवाई अड्डे का परिचालन करने वाली कंपनी को विमानों के उतरने, पार्किंग और दूसरी सुविधाओं से जुड़े शुल्कों में 346 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति देने का निर्णय किया। नई दरें दो वर्ष के लिए लागू होंगी।
इसके अलावा प्राधिकरण ने घरेलू और विदेशी उड़ानों के यात्रियों पर उपयोक्ता विकास शुल्क (यूडीएफ) भी बढ़ा दिया है। अगले साल से यह शुल्क और ऊंचा हो जाएगा। आदेश में कहा गया है कि इन शुल्कों को विमानन कंपनियों और हवाई अड्डे का इस्तेमाल करने वाले दूसरे लोगों को चुकाना होगा।
हालांकि वर्ष 2012-13 के लिए हवाई अड्डे शुल्क में की गई बढ़ोतरी जीएमआर के नेतृत्व वाले संयुक्त वेंचर दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) द्वारा की गई मांग के मुकाबले आधी है। डायल ने शुल्कों में औसतन 774 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की थी। आदेश में कहा गया है कि 2012 से 2014 के बीच यह 345.92 प्रतिशत बढ़ोतरी ‘नियंत्रित अवधि के दौरान एकल बार की जा सकेगी।’
प्राधिकरण ने विमान से हवाई अड्डे पर उतरने वाले यात्रियों को भी यूडीएफ के दायरे में शामिल किया है। पहले सिर्फ हवाई अड्डे से उड़ाने भरने वाले यात्री इसके दायरे में आते थे और घरेलू यात्रियों को 200 रुपये, जबकि विदेशी यात्रियों को 1,300 रुपये शुल्क चुकाना पड़ता है। उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि बढ़े हुए बोझ को विमानन कंपनियां यात्रियों पर डालेंगी, जिससे टिकटों के दामों में और बढ़ोतरी होगी।