खास बातें
- नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने गुरुवार को घोषणा की कि वर्ष 2020 तक एयर इंडिया में 30 हजार करोड़ रुपये डाले जाएंगे।
नई दिल्ली: नकदी के संकट से जूझ रही एयर इंडिया को प्रोत्साहन प्रदान करते हुए सरकार ने उसे अगले नौ साल में और 30,000 करोड़ रुपए की शेयर पूंजी देने और इसके बेड़े में 27 बोइंग 787 ड्रीमलाईनर जोड़ने के साथ एक इस सरकारी एयरलाइन के कायाकल्प के विशाल पैकेज की घोषणा की।
इसके साथ ही सरकार ने एयर इंडिया की एमआरओ (रख-रखाव, मरम्मत और ओवरहॉल) कारोबार और उसकी इंजीनियरिंग सेवाओ को अलग कर उसके पूर्ण स्वामित्व में दो अलग सहयोगी कंपनियां बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।
एयर इंडिया के कुल 28,000 कर्मचारियों में से 19,000 कर्मचारियों को इन दो नयी इकाइयों में खपाया जाएगा। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) के फैसलों की घोषणा करते हुए नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने संवाददाताओं से संवाददाताओं से कहा कि मंजूर कायाकल्प योजना (टैप) और वित्तीय पुनर्गठन योजना (एफआरपी) के तहत विमानन कंपनी को शुरू में 6,750 करोड़ रुपए की शेयर पूंजी दी जाएगी।
विमानन कंपनी को वित्तीय संस्थानों, बैंक, एलआईसी और ईपीएफओ जैसे रिणदाताओं को 7,400 करोड़ रुपए सरकारी गारंटी वाले गैर परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) जारी करने की भी मंजूरी दी गई। इस राशि का उपयोग रोजमर्रा के खचरें के लिए लिए गए 21,200 करोड़ रुपए के रिण के आंशिक भुगतान के लिए किया जाएगा।
एयर इंडिया पर कुल 67,520 करोड़ रुपए का रिण और बकाया है जिसमें 21200 करोड़ रुपए का रिण रोज के काम काज के लिए, 22,000 करोड़ रुपए का रिण विमान खरीद के लिए दीर्घकालिक रिण है तथा 4,600 करोड़ रुपए सामान आपूर्ति करने वालों का बकाया है। इसके अलावा कंपनी का संचित घाटा 20,320 करेाड़ रुपए तक पहुंच गया है।
सीसीईए ने बिक्री और लीजबैक के आधार पर 27 बोइंग 787 ड्रीमलाईनर और तीन बोइंग 777-300 के अधिग्रहण की मंजूरी दी। इस प्रणाली के तहत एक पक्ष विमान खरीददार को बेचता है जो तुरंत इसे विक्रेता को लीज पर देता है। इस व्यवस्था के तहत खरीदार को बिना पूंजी लगाए परिसंपत्ति का पूरा उपयोग करने की मंजूरी होती है।
एयर इंडिया समेत भारतीय विमानन कंपनियों में विदेशी विमानन कंपनियों को निवेश करने की मंजूरी के संबंध में पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि इस संबंध में फैसला मंत्रिमंडल की अगली बैठक में किया जाएगा।
सिंह ने कहा कि वित्तीय पुनर्गठन के प्रस्तावों के तहत 2012 से 2021 के बीच 30,231 करोड़ रुपए की अतिरिक्त इक्विटी डाली जाएगी जिसकी अनुमति मंत्रिमंडल ने दी। उन्होंने कहा ‘लेकिन एयर इंडिया को कायकल्प योजना के तहत तय जिम्मेदारियों केा पूरा करना होगा और ये फायदे प्राप्त करने के लिए कार्यप्रदर्शन के कुछ सुनिश्चित लक्ष्य हासिल करने होंगे।’ यह पूछने पर कि क्या एयर इंडिया को भी विदेशी विमानन कंपनी के तौर पर एक योग्य भागीदार तलाशने की मंजूरी होगी मंत्री ने कहा कि विदेशी विमानन कंपनी को 49 फीसद हिस्सेदारी लेने का फैसला हर भारतीय विमानन कंपनी के लिए होगा।
उन्होंने कहा ‘एयर इंडिया को सही भागीदार ढूंढना होगा, लेकिन इसका स्वामित्व सरकार का होगा।’
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में सिंह ने कहा कि विदेशी कंपनियां अपने आप निवेश नहीं कर सकेंगे। इन्हें जांच के हर दौर से गुजरना होगा। उन्होंने कहा ‘‘कंपनियों पर भारतीय भागीदार का स्वामित्व और पर्याप्त प्रबंधकीय नियंत्रण रहेगा .. दो तिहाई निदेशक भारतीय होंगे। फिर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी ध्यान में रखा जाएगा।’’ मंत्री ने कहा कि एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम ने एयर इंडिया के 11,000 करोड़ रुपए के अल्पकालिक कार्यपूंजी को दीर्घकालिक रिण में तब्दील करने की मंजूरी दे दी है।
एयरइंडिया की दो सहयोगी कंपनियों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि एमआरओ सहयोगी कंपनी का नाम एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड होगा और इसे अगले तीन साल में 375 करोड़ रुपए की इक्विटी मिलेगी। ग्राउंड परिचालन से जुड़ी दूसरी सहयोगी कंपनी का नाम एयर इंडिया एयर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड होगा जिसे अगले 12 साल में 393 करोड़ रुपए मिलेंगे।
मंत्री ने कहा कि इन सहयोगी कंपनियों का परिचालन जल्द शुरू होगा। उन्होंने कहा कि एमआरओ सहयोगी कंपनी मे 7,000 कर्मचारी नियुक्त होंगे और उम्मीद है कि यह एशिया प्रशांत क्षेत्र में 1.5 अरब डालर के एमआरओ कारोबार का फायदा उठाएगी। इसी तरह ग्राउंड परिचालन करने वाली कंपनी में एयर इंडिया के 12,000 कर्मचारियों को नियुक्त किया जाएगा। दोनों सहयोगी कंपिनयों को स्वतंत्र कारोबार कंेद्र की तरह विकसित किया जाएगा।