यह ख़बर 08 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित हुई थी

चार साल में होगा एयर इंडिया का कायाकल्प

खास बातें

  • एयर इंडिया को 4 साल में परिचालन लाभ की स्थिति में लाने की योजना को 20 बैंकों के समूह ने समर्थन दिया है।
Mumbai:

एयर इंडिया को 4 साल में परिचालन लाभ की स्थिति में लाने की योजना को 20 बैंकों के समूह ने समर्थन दिया है। इससे इस विमानन कंपनी के 40,000 करोड़ रुपये के कर्ज की पुनर्गठन योजना को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। एयर इंडिया प्रबंधन और बैंकों के समूह की तीन घंटे चली बैठक में प्रबंधन ने विस्तृत कार्य योजना पेश की। इसमें हर साल आय में 5,000 करोड़ रुपये की वृद्धि तथा लागत में 4,000 करोड़ रुपये की कमी के लक्ष्य की बात कही गयी है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार एयर इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अरविंद जाधव ने बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक में एयर इंडिया को मुनाफे में लाने की कार्ययोजना तथा वित्तीय पुनर्गठन के बारे में जानकारी दी। इसका मकसद नकदी संकट से जूझ रही कंपनी को 2015 तक लाभ में लाना है। अधिकारियों के अनुसार बैंक प्रमुख मामले को आगे बढ़ाने के लिये समूह के भीतर छोटा समूह गठित करेंगे। एयर इंडिया पर 40,000 करोड़ रुपये का ऋण बकाया हो गया है। इसमें से 18,000 करोड़ रुपये का ऋण बैंकों के समूह द्वारा दैनिक कारोबार के लिए दिया गया है। शेष 22,000 करोड़ रुपये का ऋण नए विमानों के ऑर्डर से जुड़ा है। बैंक ऑफ बड़ौदा के महाप्रबंधक अरुण तिवारी ने कहा, यह पहली बैठक थी जिसमें एयर इंडिया प्रबंधन के साथ सभी ऋण देने वाले बैंक शामिल हुए। एसबीआई कैप्स और डेलायट ने एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति में सुधार के बारे में प्रस्तुती दी। उम्मीद है कि अगले 10 दिन में हमारी दूसरी बैठक होगी। एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) कैप्स ने इस बारे में आज कुछ बातें प्रस्तुत कीं। उल्लेखनीय है कि एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिये 10 बैंकों के समूह ने पिछले साल एसबीआई कैप्स को रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी।


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