खास बातें
- सीबीआई के वकील ने पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत से कहा कि जांच एजेंसी ने इस मामले की छानबीन की है।
नई दिल्ली: सीबीआई ने 2−जी घोटाले में टाटा टेलीकॉम को क्लीनचिट दे दी है। 2−जी घोटाले में रतन टाटा और कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया को आरोपी बनाने की याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत से कहा कि जांच एजेंसी ने इस मामले की छानबीन की है। इससे पता चला है कि टाटा टेलीकॉम को लाइसेंस देने में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। कंपनी को इससे पहले भी कई बार लाइसेंस मिल चुके हैं और हमेशा टेलीकॉम रेगुलेटरी की सिफारिशों का पालन किया गया। यह पहला मौका है जब सीबीआई ने टाटा के बारे में इतना खुलकर बोला है। धर्मेंद्र पांडे नाम के एक वकील ने 2जी घोटाले में टाटा और राडिया को आरोपी बनाने की अर्ज़ी दी थी। धर्मेंद्र पांडे का आरोप है कि टाटा को गलत तरीके से डुअल टेक्नोलॉजी लाइसेंस दिए गए थे। 2008 में रतन टाटा की कंपनी को डुअल टेक्नोलॉजी लाइसेंस दिए गए थे आरोप है कि यह लाइसैंस गैरकानूनी तरीके से टाटा को मिले। इस नीलामी में यूनीटेक ने भी बोली लगाई थी आरोप है कि यूनिटेक टाटा से मिली हुई थी और उसने टाटा की फ्रंट कंपनी की तरह काम किया। इसी सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में भी एक एनजीओ ने टाटा के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है। 2 जी घोटाले के एक आरोपी और स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद बलवा ने पिछले महीने इस मामले में रतन टाटा पर निशाना साधा था। बलवा के वकील ने 18 मई को कोर्ट में टाटा और पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा के बीच भेजे गए कई खतों को पेश किया था जो जून 2008 से सितंबर 2009 के बीच भेजे गए। खतों में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की ओर से राजा के चुनाव क्षेत्र पेरंबलूर में एक मेडिकल कॉलेज के लिए 20 करोड़ रुपए की डोनशन का ज़िक्र था। लेकिन टाटा ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि ये सच है कि 2008−2009 में रतन टाटा से पेरंबलूर मेडिकल कॉलेज को 20 करोड़ रुपए डोनेशन देने की मांग की गई थी। लेकिन ये पैसा नहीं दिया गया क्योंकि तमिलनाडु सरकार को पहले अपनी ओर से 82 करोड़ रुपए लगाने थे जो उसने खर्च नहीं किए।