यह ख़बर 17 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

2जी : कंपनी लॉ बोर्ड पहुंची सीबीआई की जांच

खास बातें

  • स्वान टेलीकाम ने अनिल अंबानी ग्रुप के लिए फ्रंट कंपनी के रूप में काम किया और वह 2008 में 2जी लाइसेंस तथा स्पेक्ट्रम पाने की पात्र ही नहीं थी।
New Delhi:

रिलायंस धीरूभाई अंबानी समूह की तरफ से स्वान टेलीकाम को धन हस्तांतरण की जांच चलने के बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो रिलायंस ग्रुप और स्वान के संबंधों की पड़ताल के लिए शीघ्र ही कंपनी लॉ बोर्ड :सीएलबी: से संपर्क करेगा। ऐसा आरोप है कि स्वान टेलीकाम ने अनिल अंबानी ग्रुप के लिए फ्रंट :कटपुतली: कंपनी के रूप में काम किया और वह 2008 में 2जी लाइसेंस तथा स्पेक्ट्रम पाने की पात्र ही नहीं थी। सरकारी अंकेक्षक कैग ने पिछले साल नवंबर में अपनी रपट में भी इसका ज्रिक किया था। सीबीआई में जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि वह शीघ्र ही सीएलबी से संपर्क कर स्वान टेलीकाम के इक्विटी ढांचे की पड़ताल करने को कहेगी जो कंपनी पंजीयक से ब्यौरे के सत्यापन को कह सकता है। उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने इस बारे में बुधवार को रिलांयस ग्रुप के अध्यक्ष अनिल अंबानी से तीन घंटे पूछताछ की थी। सीबीआई ने अंबानी तथा जेल में बंद पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा को लगभग एक घंटा आमने सामने किया लेकिन इस मुलाकात के दौरान दोनों 'असहयोगी रवैया' अपनाये रहे। सूत्रों के अनुसार जांचकर्ताओं ने कल शाम दोनों को स्वान टेलीकाम में हिस्सेदारी के बारे में काफी कुरेदा। सीबीआई ने दोनों को आमने सामने कर के स्वान टेलीकॉम में इक्विटी से जुड़े मुद्दे और रिलायंस कम्युनिकेशंस को दोहरी प्रौद्योगिकी की अनुमति पर एक घंटे तक पूछताछ की लेकिन दोनों का रुख असहयोगपूर्ण रहा और अपनी बात पर अड़े रहे। सूत्रों के अनुसार अंबानी से इस बारे में सवाल किये गये कि क्या रिलायंस कम्युनिकेशंस की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तरीके से या फिर उसकी दूसरी इकाईयों के जरिये स्वान में दस प्रतिशत से अधिक की भागीदारी है। नियमों के अनुसार कोई दूरसंचार कंपनी इस क्षेत्र की किसी दूसरी कंपनी में दस प्रतिशत या उससे अधिक की हिस्सेदार नहीं हो सकती। स्वान टेलिकॉम में टाइगर ट्रेडर्स प्रा.लि. की 90.13 प्रतिशत और रिलायंस टेलिकॉम की 9.87 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दोनों पर ही सीबीआई की नजर है। इन पर डीएमके के चैनल कलइग्नार टेलिविजन को धन हस्तांतरण का आरोप है। अंबानी समूह के अनिल अंबानी को कल सीबीआई मुख्यालय बुलाया गया था। उनसे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के सिलसिले में सवाल पूछे गये। स्वान टेलिकॉम की प्रवर्तक कंपनी डी बी रीएल्टी समूह के प्रबंध निदेशक शाहिद उस्मान बलवा पहले से ही सीबीआई की हिरासत में है। दूरसंचार नियामक ट्राई की सिफारिशों के आधार पर मंत्रालय ने 17 अक्तूबर 2007 को दोहरी प्रौद्योगिकी की अनुमति दी थी। लेकिन आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने इस मामले में नीति घोषित होने से पहले ही आवेदन कर दिया था। रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड ने दोहरी प्रौद्योगिकी की अनुमति पाने के लिए जरुरी शर्तों को 19 अक्तूबर 2007 को ही पूरा कर लिया था। कंपनी ने रिलायंस इंफोकॉम के जरिये 20 सेवा क्षेत्रों के लिये 1,645 करोड रुपये का प्रवेश शुल्क भी जमा करा लिया था। शर्तों के अनुसार इस राशि को वापस नहीं किया जाना था। कैग ने अपनी रिपोर्ट में इसका उल्लेख करते हुये कहा है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस के लिये रिलायंस इंफोकॉम लिमिटेड द्वारा दिया गया बैंक ड्राफ्ट तय नियमों के अनुरुप नहीं था और जिस तरह से प्रवेश शुल्क जमा किया गया यह काम जल्दबाजी में किया गया लगता है। इधर, अनिल समूह ने कल कहा कि अनिल अंबानी अपनी साप्ताहिक दिल्ली यात्रा के दौरान यहां पहुंचे थे और उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में खुद ही सीबीआई अधिकारियों से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों को स्पष्ट किया। अनिल धीरुभाई अंबानी समूह :एडीएजी: ने एक वक्तव्य में कहा रिलायंस टेलिकॉम और रिलायंस कम्युनिकेशंस और एडीएजी के किसी व्यक्ति अथवा कंपनी अथवा उसकी सहयोगी की जनवरी 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटन अथवा उसके बाद स्वान टेलिकॉम लिमिटेड में कहीं कोई भागीदारी नहीं रही है।


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