यह ख़बर 19 मई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

2जी : पूर्व महान्यायवादी सोराबजी से होगी पूछताछ

खास बातें

  • 2जी मामले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति अब भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में बनी दूरसंचार नीति से जुड़ीं फाइलों को खंगालने में जुट गई है।
नई दिल्ली:

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति अब वर्ष 1999 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार में बनी दूरसंचार नीति से जुड़ीं फाइलों को खंगालने में जुट गई है। समिति राजग के समय में महान्यायवादी रहे सोली सोराबजी को अपने समक्ष पेश करने का निर्णय लिया है। समिति के अध्यक्ष पीसी चाको ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने निर्धारित लाइसेंस शुल्क व्यवस्था से हटकर मुनाफा हिस्सेदारी की दूरसंचार नीति को लागू किया। इस नीति से कथित रूप से देश के राजस्व को जो नुकसान पहुंचा, जांच समिति अब उसका हिसाब कर रही है। उन्होंने कहा कि समिति राजग सरकार के समय महान्यायवादी रहे सोली सोराबजी को अपने समक्ष पेश करने का निर्णय लिया है। समिति उनसे दूरसंचार कम्पनियों के लिए अपनाई गई दूसरी नीति के बारे में उनकी राय जानेगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चाको ने कहा कि दिन भर चली बैठक में उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के वर्ष 2000 की रिपोर्ट को देखा। जिसमें दूरसंचार नीति में बदलाव करने से राजस्व को हुए नुकसान के बारे में बताया गया है। इस नीति को जुलाई 1999 के मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। चाको ने कहा, "सीएजी ने निर्धारित लाइसेंस शुल्क व्यवस्था से हटकर मुनाफा हिस्सेदारी नीति को लागू करने पर प्रतिकूल टिप्पणियां की हैं।" उन्होंने कहा कि इस नीति को उस समय लागू किया गया जब भाजपा के प्रमोद महाजन केंद्रीय दूरसंचार मंत्री थे। उन्होंने कहा कि कई दूरसंचार कम्पनियों ने सरकार के साथ मुनाफा नहीं बांटा था। समिति इसके कारणों और नुकसान की भरपाई पूरा करने के लिए दूरसंचार मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानना चाहती है। चाको ने कहा कि सीएजी ने वर्ष 2000 की अपनी रिपोर्ट में नुकसान के आंकड़ों का जिक्र नहीं किया है क्योंकि उस समय आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने कहा, "अब आंकड़े उपलब्ध हैं और हमने दूरसंचार सचिव से नुकसान का निर्धारण करने के लिए कहा है।" यह पूछे जाने पर कि वर्ष 1999 की दूरसंचार नीति को जांच के दायरे में लाने पर क्या विपक्षी पाटिर्यो ने आपत्ति नहीं की। इस पर उन्होंने कहा, "इस मसले पर राजनीतिक पार्टियों में कोई अलगाव नहीं है। सभी इस पर सहमत हैं।" उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में कैबिनेट मंत्री रहे भाजपा के जसवंत सिंह एवं यशवंत सिन्हा इस समय समिति में शामिल हैं उन्हें गवाह के बतौर समिति के समक्ष पेश किया जा सकता है।


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