यह ख़बर 25 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

रक्षा में 100 फीसदी एफडीआई चाहता है उद्योग जगत

खास बातें

  • भारत ने जहां हथियारों के आयात में चीन को पीछे छोड़ दिया है वहीं उद्योग जगत का एक संगठन देश के रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करना चाहता है, ताकि देश में आधुनिकतम सैन्य प्रौद्योगिकी आ सके और आयात में कुछ कमी
नई दिल्ली:

भारत ने जहां हथियारों के आयात में चीन को पीछे छोड़ दिया है वहीं उद्योग जगत का एक संगठन देश के रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करना चाहता है, ताकि देश में आधुनिकतम सैन्य प्रौद्योगिकी आ सके और आयात में कुछ कमी हो।

भारतीय सेना अभी अपनी कुल उपकरण और प्रणाली जरूरतों के 70 फीसदी हिस्से का आयात करता है और पिछले एक दशक में रूस, इजरायल और अमेरिका देश का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है।

एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने रक्षा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की मांग की है ताकि घरेलू औद्योगिक आधार का विकास हो, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिले और बड़े स्तर पर आयात में कमी आए।

एसोचैम ने कहा, "हमें इस सच्चाई को समझना होगा कि रक्षा क्षेत्र पूरी तरह पूंजी और प्रौद्योगिकी पर आधारित है। देश में एक मजबूत औद्योगिक आधार बनाने के लिए हमें विदेशी पूंजी और प्रौद्योगिकी दोनों की जरूरत है।"

एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा कि एफडीआई पर 26 फीसदी की सीमा ने दोनों ही चीजों को देश से बाहर रखा है।

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रावत ने कहा, "हमें इस सीमा पर विचार करना होगा। इस सीमा को रखने और 100 फीसदी एफडीआई को अनुमति नहीं देने का कोई कारण नहीं है।"