जानें सत्यम घोटाले का पूरा इतिहास केवल 10 बिंदुओं में

जानें सत्यम घोटाले का पूरा इतिहास केवल 10 बिंदुओं में

नई दिल्ली:

सत्यम घोटाले के सभी दस आरोपियों को हैदराबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया है। सत्यम कंप्यूटर और इस घोटाले से जुड़ी 10 ख़ास बातों पर एक नजर....
 
1. सत्यम कंप्यूटर की स्थापना 1987 में हुई। 1992 में ये पब्लिक लिमिटेड कंपनी में तब्दील हुई। इसके बाद ये बीएसई, एनएसई, एनवायएसई में लिस्टेड हुई। कंपनी की स्थापना रामालिंगा राजू ने की थी, जो परंपरागत तौर पर आंध्र प्रदेश के कृषि परिवार से संबंधित थे।
 
2.रामालिंगा राजू ने महज 20 कर्मचारियों के साथ मिलकर कंपनी की शुरुआत की थी। जब कंपनी घोटाले में फंसी तब 66 देशों में कंपनी का कारोबार फैला हुआ था और इसमें करीब 53 हज़ार कर्मचारी काम करते थे। रामालिंगा राजू 7 जनवरी, 2009 तक सत्यम कंप्यूटरर्स के चेयरमैन बने रहे।

3.सत्यम कंप्यूटर्स और रामालिंगा राजू ने बड़ी तेजी से कंप्यूटर सोल्यूशन के बाज़ार में जगह बनाई। अरनेस्ट एंड यंग ने रामलिंगा राजू को 1999 में साल का इंटरप्रियन्योर चुना। 2002 में उन्हें एशिया बिजनेस लीडर का सम्मान भी मिला। 2008 में कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए गोल्डन पीकाक अवार्ड से भी राजू को सम्मानित किया गया।

4.सत्यम घोटाले को देश का अब तक का सबसे बड़ा ऑडिट फ्रॉड माना जाता है, जो 7 जनवरी 2009 को सामने आया था। इस कंपनी के संस्थापक और तत्कालीन चेयरमैन बी. रामलिंगा राजू ने खुद माना उन्होंने काफी समय तक कंपनी के खातों में हेरा-फेरी की थी और वर्षों तक मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था। इस खुलासे के दो दिन बाद आंध्र प्रदेश पुलिस की अपराध जांच शाखा ने राजू को उनके भाई रामा राजू और अन्य के साथ गिरफ्तार कर लिया था।

5.22 जनवरी, 2009 को सीआईडी ने अदालत को बताया कि सत्यम में कुल 40 हजार कर्मचारी काम करते थे। कंपनी ने इन्हीं कर्मचारियों की संख्या को 53 हजार बताया हुआ था। राजू इन तेरह हजार कर्मचारियों के वेतन के रूप में हर महीने 20 करोड़ रुपये विद ड्रॉ कर रहे थे।

6. राजू ने निवेशकों के पैसे को बिना निवेशकों को जानकारी दिए अपने बेटों के नाम पर बनाई कंपनी मायता इंफ्रा और मायता प्रोपर्टीज में डायवर्ट किया था। इसके अलावा उन पर कंपनी के मुनाफा गलत दर्शाने का आरोप भी था। 6 साल चली जांच में तीन हज़ार से ज्यादा डाक्यूमेंट्स और 226 चश्मदीद के बयानों को आधार बनाया गया।

7. सेबी के मुताबिक, फर्जीवाड़े के जरिये 6 करोड़ निवेशकों को सत्यम के कर्ता-धर्ताओं ने करीब 7800 करोड़ रुपये को चूना लगाया था। ये ऐसा फ्रॉड था, जो एक दिन में नहीं हो सकता था। ये लंबे समय से चला आ रहा था क्योंकि रामालिंगा राजू ने अपने ऑडिटरों की मदद से इसे कर रहे थे।
 
8.सत्यम पर 2001 और 2003 में भी धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की गई थी, लेकिन तब शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया था. यहां तक कि वर्ल्ड बैंक ने इसके साथ किसी भी तरह के लेन देन पर 8 साल की पाबंदी लगा रखी थी।

9.घोटाले के सामने आने से पहले सत्यम भारत की आईटी कंपनियों में चौथे स्थान पर थी। घोटाले के सामने आने के बाद सत्यम भारत की सबसे कम वैल्यूबल आईटी कंपनी बन गई।

10.हालांकि बाद में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने सत्यम कंप्यूटर्स का अधिग्रहण कर लिया। जुलाई, 2009 में सत्यम का नाम महिंद्रा सत्यम हो गया। 21 मार्च, 2012 को दोनों कंपनियों के बोर्ड ने इस अधिग्रहण को मंजूरी के बाद महिंद्रा सत्यम का विलय टेक महिंद्रा में कर दिया गया।


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