Trump Tariff Timeline: 'लिबरेशन डे' से कोर्टरूम तक, सुप्रीम कोर्ट में पलटी ट्रंप की बाजी! 10 महीने की पूरी टाइमलाइन

ट्रंप ने 2025 में 'लिबरेशन डे' के नाम से बड़े पैमाने पर टैरिफ लागू किए थे. भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया और वैश्विक व्यापार नीति में अनिश्चितता बढ़ गई.

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Trump Trade War Timeline: ट्रंप ने करीब 10 महीने पहले कई देशों पर टैरिफ का ऐलान किया था

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार देकर एक साल से चल रहे ट्रेड वॉर को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट में 6-3 के फैसले में अदालत ने साफ कहा कि राष्ट्रीय आपातकाल के कानून का इस्तेमाल करके व्यापक टैरिफ नहीं लगाए जा सकते. ये फैसला उस लंबे घटनाक्रम का नतीजा है, जिसने दुनियाभर के बाजारों में उथल-पुथल मचा दी, कई देशों के बीच तनाव बढ़ाया. साथ ही कई बड़े व्यापार समझौतों की वजह भी बना.

ये सब शुरू कब हुआ?

ट्रंप ने 2025 में 'लिबरेशन डे' के नाम से बड़े पैमाने पर टैरिफ लागू किए थे. भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया और वैश्विक व्यापार नीति में अनिश्चितता बढ़ गई. इसके बाद लगातार बातचीत, चेतावनी और कानूनी लड़ाई का दौर चला.

ट्रंप टैरिफ वॉर की पूरी टाइमलाइन 

  1. 2 अप्रैल 2025: ‘Liberation Day' पर भारत समेत कई देशों पर 26% तक अतिरिक्त टैरिफ, वैश्विक बाजारों में हलचल.
  2. 9 अप्रैल: बाजार गिरने के बाद देश-विशेष टैरिफ 90 दिन के लिए रोके गए.
  3. 23-29 अप्रैल: भारत-अमेरिका के बीच वॉशिंगटन में व्यापार वार्ता शुरू.
  4. 23 मई: ट्रंप ने चेतावनी दी- अमेरिका में बिकने वाले विदेशी iPhone पर 25% टैरिफ लग सकता है.
  5. 29 मई: निचली अदालत के फैसले के बाद अपील कोर्ट ने टैरिफ अस्थायी रूप से बहाल किए.
  6. जुलाई 2025: कई देशों पर नए टैरिफ- स्टील, कार, वियतनाम और कनाडा समेत 69 ट्रेड पार्टनर्स प्रभावित.
  7. फरवरी 2026: भारत-अमेरिका द्विपक्षीय समझौता, भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर करीब 18% किया गया.
  8. 20 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया.

ट्रेड वॉर का वैश्विक असर

इस दौरान चीन पर टैरिफ 145% तक पहुंच गए थे, जबकि जापान और यूरोपीय संघ के साथ अलग-अलग समझौते कर शुल्क कम किए गए. भारत ने लंबी बातचीत के बाद समझौता किया, जिससे अतिरिक्त पेनल्टी हटाई गई और बाजार पहुंच में सुधार हुआ.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश

अदालत ने कहा कि संविधान के तहत टैरिफ तय करने की असली शक्ति, संसद के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. हालांकि सेक्टर-विशेष टैरिफ अब भी लागू रह सकते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी की दिशा बदल सकता है, लेकिन ट्रेड टेंशन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

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