साल 1988 में ही आ गया था दुनिया का पहला प्लास्टिक नोट, 60 से ज्यादा देश कर रहे इस्तेमाल

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि देश में प्लास्टिक के नोट चलाने के प्रपोजल पर विचार हो रहा है. हालांकि अभी ये शुरुआती लेवल पर है और कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार देश में प्लास्टिक करेंसी नोट पर अभी कोई आखिरी फैसला नहीं लिया है.
IANS

बीते कुछ दिनों से देश में प्लास्टिक नोट के आने की चर्चाएं लगातार हो रही हैं. आम नागरिकों के बीच भी सवाल पूछा जा रहा कि क्या आरबीआई फटने और भीगने से महफूज प्लास्टिक नोट को जारी करने जा रहा है? इस सभी स्थिति पर बीते दिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बड़ा अपडेट दिया था. गवर्नर ने बताया कि रिजर्व बैंक देश में प्लास्टिक की करेंसी नोट जारी करने पर विचार कर रहा है, हालांकि, अभी इस पर कोई भी आखिरी फैसला नहीं लिया गया है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि सबसे पहले किस देश में प्लास्टिक नोट की शुरुआत हुई थी? 

प्लास्टिक नोट के मामले में ऑस्ट्रेलिया ने मारी थी बाजी

आपको लगता है कि प्लास्टिक के नोटा का आइडिया नया है तो आप गलत है. दरअसल दुनिया के करीब 60 से ज्यादा देशों में प्लास्टिक करेंसी चल रही है. इनमें सबसे आगे ऑस्ट्रेलिया का ना है, जिसने साल 1988 में दुनिया के सामने पहली बार पॉलीमर बेस्ड नोट दुनिया के सामने पेश किए थे. आज ऑस्ट्रेलिया की करेंसी को दुनिया की सेफ और मजबूत करेंसी में माना जाता है. इसके बाद साल 2011 में कनाडा ने अपने सभी नोटों को पॉलीमर में बदला था.

शुरुआती दौर में प्रपोजल

मीडिया और सोशल मीडिया पर प्लास्टिक के नोटों को लेकर चल रही खबरों पर गवर्नर ने कहा कि, "पॉलिमर नोटों से जुड़ी अभी की रिपोर्ट्स में सच्चाई जरूर है, लेकिन रिजर्व बैंक अभी तक किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा है. आरबीआई फिलहाल इसके फायदे और नुकसान का रिव्यू कर रहा है. देखा जा रहा है कि भारत देश में इस लागू करना क्या वाकई में फायदेमंद साबित होगा या फिर नहीं. ये योजना अभी शुरुआती फेज में है और जैसे ही कोई बड़ा फैसला लिया जाता है तो देश को इसकी जानकारी दे दी जाएगी."

'एटीएम में कैश की किल्लत नहीं'

प्लास्टिक करेंसी पर अपडेट के साथ ही गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि, "देश में कैश पर्याप्त मात्रा में है. यानी बैंकिंग सिस्टम में करेंसी का स्टॉक नियम के अनुसार मौजूद है. इसके अलावा त्योहारों और शादियों के सीजन में होने वाली लोकल परेशानी के लिए आरबीआई अलर्ट मोड पर है. मान लीजिए देश के किसी भी कोने में एक या दो एटीएम में पैसे की किल्लत है भी तो रिजर्व बैंक वहां तेजी के साथ सप्लाई कर रहा है."

Advertisement

प्लास्टिक नोट क्यों है खास?

मालूम हो कि दुनिया के कई दूसरे देश जैसे ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन के साथ कनाडा पहले ही प्लास्टिक नोट का इस्तेमाल कर रहे हैं. कॉटन पेपर वाले नोटों के मुकाबले इन प्लास्टिक नोटों की उम्र ज्यादा होती है. यानी ये आसानी से ना तो फटते हैं ना ही पानी में गलते हैं, इसके अलावा इनकी नकल कर पाना भी बहुत मुश्किल होता है. हालांकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसे ही फायदे के साथ प्लास्टिक नोट के नुकसान भी हैं. मसलन इनकी छपाई की कॉस्ट कॉटन पेपर वाले नोट के मुकाबले ज्यादा होती है. साथ ही इसको रीसायकल कर पाना भी आसान नहीं है. इसलिए आरबीआई हर पहलू की जांच करके ही इन्हें देश में लागू करेगा.

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा के इस बड़े अपडेट के बाद एक बात तो साफ है कि भारतीय मार्केट में प्लास्टिक नोटों की एंट्री होगी या नहीं, इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. लेकिन देश में कैश को लेकर कोई कमी नहीं है, ये खबर राहत देने वाली है.

Advertisement

ये भी पढ़ें- 5 महीने में 1 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म, AI के दौर में खाली हो रहे दफ्तर?

Featured Video Of The Day
UP से लेकर Gujarat और Bhopal तक... कहां-कहां चला प्रशासन का Bulldozer?
Topics mentioned in this article