मुंद्रा पोर्ट से भारत की क्रूड लॉजिस्टिक्स में ऐतिहासिक छलांग, जेटी पर संभाला 3.3 लाख क्यूबिक मीटर कच्चा तेल

Mundra Port Jetty: अदाणी का मुंद्रा पोर्ट पहले ही भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट है. कच्छ की खाड़ी में मौजूद यह डीप-वॉटर, ऑल-वेदर पोर्ट उत्तर और पश्चिम भारत के लिए एक बड़े समुद्री एंट्री गेट के रूप में काम करता है.

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  • अदाणी ग्रुप के मुंद्रा पोर्ट ने देश का पहला पूरी तरह लदा वेरी लार्ज क्रूड कैरियर सीधे जेटी पर संभाला है
  • पहले इतने बड़े तेल टैंकरों को गहरे समुद्र में रोककर छोटे जहाजों से किनारे लाया जाता था, अब सीधे बर्थिंग संभव
  • जेटी 489 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़ी है, जिससे तेल सीधे राजस्थान पहुंचता है
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Mundra Port Jetty: भारतीय समुद्री इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है. अदाणी ग्रुप के मुंद्रा पोर्ट ने साल की शुरुआत में वह कर दिखाया है जो अब तक भारत के लिए एक सपना था. देश का पहला पूरी तरह से लदा हुआ वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (VLCC) एमटी न्यू रिनाउन नाम का विशाल टैंकर करीब 3.3 लाख क्यूबिक मीटर कच्चा तेल लेकर मुंद्रा पहुंचा, जिसे सीधे जेटी पर संभाला गया. इसके साथ ही यह उपलब्धि भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में ले आई है, जिनके पास फुली लोडेड विशाल तेल टैंकरों को सीधे किनारे पर संभालने की क्षमता है.

क्यों खास है यह उपलब्धि?

अब तक भारत में इतने बड़े जहाजों (3.3 लाख क्यूबिक मीटर तेल क्षमता) को गहरे समुद्र में ही रोकना पड़ता था. वहां से छोटे जहाजों के जरिए तेल को किनारे तक लाया जाता था, जिसे लाइटरिंग कहा जाता है. इसके अलावा सिंगल पॉइंट मूरिंग (SPM) पाइपलाइन्स का सहारा लिया जाता था. इससे अब सीधे जेटी पर बर्थिंग से तेल उतारने का समय काफी कम हो जाएगा. मिड-सी ऑपरेशंस की जरूरत खत्म होने से लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा. वहीं, सेफ्टी की बात करें तो समुद्री लहरों और तेज हवाओं के बीच भी तेल सुरक्षित तरीके से डिस्चार्ज होगा.

अदाणी का मुंद्रा पोर्ट पहले ही भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट है. कच्छ की खाड़ी में मौजूद यह डीप-वॉटर, ऑल-वेदर पोर्ट उत्तर और पश्चिम भारत के लिए एक बड़े समुद्री एंट्री गेट के रूप में काम करता है. यहां 27 ऑपरेशनल बर्थ और दो सिंगल पॉइंट मूरिंग हैं और यह ड्राई बल्क, ब्रेक-बल्क, प्रोजेक्ट कार्गो, लिक्विड्स, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और क्रूड ऑयल जैसे अलग-अलग कार्गो को संभालने में सक्षम है. मुंद्रा केप साइज, वीएलसीसी, यूएलसीसी और अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स को भी आसानी से हैंडल करता है.

मुंद्रा की नई ताकत

मुंद्रा पोर्ट की यह वीएलसीसी जेटी किसी तकनीकी अजूबे से कम नहीं है. इसकी मजबूती और गहराई इसे दुनिया के बेहतरीन पोर्ट्स की श्रेणी में खड़ा करती है. इस जेटी की लंबाई 400 मीटर है, वहीं बर्थ गहराई 25 मीटर है. इसके अलावा लोडिंग क्षमता 10 हजार से 12 हजार क्यूबिक मीटर प्रति घंटा है. ये 489 किमी लंबी पाइपलाइन सीधे बाड़मेर रिफाइनरी (राजस्थान) तक जुड़ा हुआ है.

यह सिर्फ पोर्ट की सफलता नहीं है, बल्कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए एक मास्टरस्ट्रोक है. मुंद्रा पोर्ट सीधे HPCL की राजस्थान स्थित बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़ा है.ॉ इसका मतलब है कि अब खाड़ी देशों या दूसरे जगहों से आने वाला कच्चा तेल बिना किसी रुकावट और देरी के सीधे राजस्थान की रिफाइनरी तक पहुंचेगा. इससे गुजरात और राजस्थान के औद्योगिक विकास को नए पंख लगेंगे.

ग्लोबल मैप पर मुंद्रा का दबदबा

अदाणी पोर्ट्स (APSEZ) का मुंद्रा पोर्ट पहले ही 200 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो हैंडल करने वाला देश का पहला पोर्ट बन चुका है. वर्ल्ड बैंक के कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स में भी मुंद्रा ने अपनी धाक जमाई है. 3.6 लाख मीट्रिक टन के डिस्प्लेसमेंट वाले जहाजों को संभालने की यह क्षमता साबित करती है कि भारत अब वैश्विक समुद्री व्यापार का नया केंद्र बनने को तैयार है. 

वित्त वर्ष 2024-25 में मुंद्रा भारत का पहला ऐसा पोर्ट बना, जिसने एक ही साल में 200 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कार्गो हैंडल किया. इसके अलावा, वर्ल्ड बैंक के कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स में 2024 और 2025 के लिए मिली मान्यता ने इसकी वैश्विक साख को और मजबूत किया है. 

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