साल 2005 में रिलीज हुई फिल्म ‘बंटी और बबली' का गाना ‘कजरारे' हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार और लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है. रिलीज के दो दशक बाद भी यह गाना शादी-पार्टियों से लेकर स्टेज शो तक हर जगह सुनाई देता है. इस गीत की सबसे खास बात सिर्फ इसका संगीत या डांस नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी कहानी भी है. मशहूर गीतकार गुलजार ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इस गाने के बोल उन्हें उत्तर भारत की सड़कों पर दौड़ते ट्रकों के पीछे लिखे रंग-बिरंगे जुमलों से सूझे थे. वहीं, ऐश्वर्या राय के दमदार डांस और अमिताभ बच्चन व अभिषेक बच्चन की मौजूदगी ने इसे हमेशा के लिए यादगार बना दिया.
ट्रकों के पीछे लिखे जुमलों से आया ‘कजरारे' का आइडिया
गुलजार अपनी अलग सोच और अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने बताया था कि उत्तर भारत के हाईवे पर सफर के दौरान ट्रकों के पीछे लिखे वाक्य, जैसे ‘आंखों का काजल', ‘फूलों के हार' और इसी तरह के कई जुमले उनके मन में बस गए. इन्हीं शब्दों और देसी अंदाज से प्रेरित होकर उन्होंने ‘कजरारे' के बोल लिखे. यही वजह है कि इस गीत में लोकभाषा की मिठास और मस्ती का अनोखा मेल देखने को मिलता है, जिसने इसे आम लोगों से सीधे जोड़ दिया.
पहली और आखिरी बार साथ दिखे अमिताभ, अभिषेक और ऐश्वर्या
‘कजरारे' की एक और खासियत यह है कि हिंदी सिनेमा के इतिहास में यह इकलौता ऐसा गाना माना जाता है, जिसमें अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय एक साथ स्क्रीन पर नजर आए. उस समय ऐश्वर्या और अभिषेक की शादी भी नहीं हुई थी. वैभवी मर्चेंट की शानदार कोरियोग्राफी और ऐश्वर्या राय के जबरदस्त डांस मूव्स ने इस गीत को नई ऊंचाई दी. इस गाने के लिए वैभवी मर्चेंट को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले.
रिलीज के 21 साल बाद भी कायम है जादू
शंकर-एहसान-लॉय के संगीत और अलीशा चिनाई, शंकर महादेवन तथा जावेद अली की आवाज ने ‘कजरारे' को एक अलग पहचान दी. रिलीज के बाद यह गीत चार्टबस्टर साबित हुआ और आज भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है. हिंदुस्तान टाइम्स ने इसे अपनी ‘Songs of the Century' सूची में जगह दी थी और इसे ‘दशक का निर्विवाद आइटम सॉन्ग' भी बताया. दो दशक बाद भी ‘कजरारे' नई पीढ़ी की प्लेलिस्ट और डांस फ्लोर पर उतना ही पसंद किया जाता है, जितना रिलीज के समय था.
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