हर दौर में कुछ गाने और गजलें ऐसी होती हैं, जिन्हें सुनते ही पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं. करीब 100 साल पहले लिखी गई एक ऐसी ही गजल आज भी लोगों के दिल को छू रही है. 1982 में जब इसे गुलाम अली ने अपनी आवाज दी, तो यह लाखों लोगों की पसंद बन गई. बाद में जगजीत सिंह ने भी इसे अपने अंदाज में गाया. अब 'धुरंधर 2' में इसकी धुन सुनाई देने के बाद यह फिर चर्चा में है. आखिर कौन सी है यह गजल? क्या आप इसका नाम जानते हैं? अगर नहीं, तो चलिए हम आपको बता देते हैं.
100 साल पुरानी गजल
'चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है…' मशहूर शायर और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हसरत मोहानी की लिखी हुई गजल है. इसके लिखे जाने की सटीक तारीख का कोई पक्का रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन मोटा-मोटा अनुमान है कि इसे 20वीं सदी की शुरुआत में लिखा गया था. यही वजह है कि इसे करीब 100 साल पुरानी गजल माना जाता है.
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हालांकि, गजल पहले से मौजूद थी, लेकिन इसे सबसे ज्यादा पहचान तब मिली, जब मशहूर गजल गायक गुलाम अली ने इसे 1982 में बी.आर. चोपड़ा की फिल्म 'निकाह' के लिए अपनी आवाज दी. उनकी गायकी ने इस गजल को घर-घर तक पहुंचा दिया. बाद में जगजीत सिंह ने भी इसे अपने अंदाज में गाया और यह गजल फिर एक नई पीढ़ी तक पहुंच गई.
'धुरंधर 2' में फिर गूंजी वही धुन
हाल ही में रिलीज हुई 'धुरंधर 2' के एक सीन में भी इस गजल की धुन सुनाई देती है. फिल्म में रणवीर सिंह के किरदार हमजा और गौरव गेरा के किरदार आलम भाई के बीच बातचीत वाले सीन में इसका इस्तेमाल किया गया है. इस छोटे से हिस्से ने भी दर्शकों का ध्यान खींच लिया और सोशल मीडिया पर कई लोगों ने फिल्म में इस गजल को शामिल करने की तारीफ की.
आखिर आज भी क्यों पसंद की जाती है?
'चुपके चुपके रात दिन' सिर्फ एक गजल नहीं, बल्कि एहसासों से भरी ऐसी रचना है, जिसे हर दौर के श्रोता अपने-अपने तरीके से महसूस करते हैं. शायद यही वजह है कि करीब एक सदी बाद भी यह गजल फिल्मों, महफिलों और संगीत प्रेमियों की पसंद बनी हुई है. बदलते दौर में भी इसकी मिठास और दर्द लोगों के दिल को उसी तरह छूते हैं, जैसे कई दशक पहले छूते थे.
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