विज्ञापन

ट्रीटमेंट में कमी के चलते काटना पड़ा एक्ट्रेस का पैर, आज हैं टीवी की नंबर वन वैंप, बोलीं- मैं सुन्न हो गई

Actress leg amputated due to inadequate treatment : सुधा चंद्रन ने एक इंटरव्यू में बताया कि 16 साल की उम्र में उन्हें एक खतरनाक बस एक्सीडेंट का सामना कर पड़ा. उन्होंने बताया कि मंदिर से घर लौटते समय उनका एक्सीडेंट हुआ. इसके बाद अस्पताल पहुंचकर उन्हें पता चला कि उनका पैर काटना पड़ेगा!

ट्रीटमेंट में कमी के चलते काटना पड़ा एक्ट्रेस का पैर, आज हैं टीवी की नंबर वन वैंप, बोलीं- मैं सुन्न हो गई
सुधा चंद्रन ने पैर खोकर भी नहीं छोड़े सपने!
नई दिल्ली:

सोचिए, अगर एक ही पल में आपका सबसे बड़ा सपना आपसे छिन जाए तो क्या होगा. क्या आप टूट जाएंगे या फिर खुद को दोबारा खड़ा करेंगे. कुछ ऐसी ही कहानी है मशहूर डांसर और एक्ट्रेस सुधा चंद्रन की, जिनकी जिंदगी एक बस हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई. मंदिर से लौटते वक्त हुआ ये एक्सीडेंट उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था. लेकिन जहां ये घटना किसी को हमेशा के लिए तोड़ सकती थी, वहीं सुधा ने इसे अपनी ताकत बना लिया और दुनिया को दिखा दिया कि असली जीत हौसले की होती है. क्या हुआ था उस दिन खुद सुधा चंद्रन की जुबानी सुनिए

कैसे हुआ एक्सीडेंट 

सुधा चंद्रन ने एक इंटरव्यू में बताया कि 16 साल की उम्र में उन्हें एक खतरनाक बस एक्सीडेंट का सामना कर पड़ा. उन्होंने कहा, "हम मंदिर से दर्शन करके लौट रहे थे, जब हमारा एक्सीडेंट हुआ. अस्पताल में जब पता चला कि मेरा पैर काटना पड़ेगा, तो मैं सुन्न हो गई. मैंने अपनी दादी से केवल यह पूछा – हम भगवान के दर्शन करके आ रहे थे, फिर मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?"

ये भी पढ़ें- 4000 करोड़ की रामायणम् में रावण ने लिए 100 करोड़, 90s में अरविंद त्रिवेदी से खौफ खाते थे लोग, फीस जान हैरान रह जाएंगे आप

जिंदगी और पैर के बीच था फैसला

सुधा ने इंटरव्यू में बताया, "एक्सीडेंट के बाद मुझे म्युनिसिपल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. वहां पर ट्रीटमेंट में कमी के चलते मेरा पैर काटना पड़ा." उन्होंने आगे बताया, "जब मैं त्रिची से मद्रास आई. वहां कोशिश की गई की कुछ कर सकें. क्योंकि मैं एक डांसर थी. एक्सीडेंट से पहले पूरे भारत में मैं 75 शोज कर चुकी हूं. तो उन्होंने इस पैर को बचाने की बहुत कोशिश की. लेकिन यह मामला एक समय पर पैर या जिंदगी में से किसी एक चीज को बचाने तक पहुंच गया. और ऑटोमैटिकली लाइफ बहुत इम्पोर्टेंट है." सुधा उस समय नाबालिग थी. इसलिए उनके माता-पिता से इजाजत ली गई, जिन्होंने सुधा की जिंदगी को चुना.  

शुरू हुआ 3 साल का गुमनाम संघर्ष 

इसके हादसे के बाद उनका डासिंग करियर खत्म समझा जाने लगा था. लेकिन कहते हैं न जहां चाह वहां राह है. सुधा नकली पैर लगाकर फिर मैदान में उतरीं. सुधा ने कहा, "आज 'तीन साल' कहना आसान लगता है, लेकिन उन तीन सालों के हर एक सेकंड का दर्द सिर्फ मैं, मेरी मां और मेरे गुरुजी जानते थे. मेरे पिता को भी इस प्रैक्टिस की खबर नहीं थी. जब भी वह काम पर जाते, हम घर का दरवाजा बंद कर लेते और मैं घंटों पसीना बहाती. तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद जब मैंने अपने पिता को बताया कि मैं स्टेज पर परफॉर्म करने जा रही हैं, तो वह दंग रह गए थे. पिता ने सिर्फ इतना कहा कि वह तैयार है, अब अपना हौसला मत डगमगाने देना."

सुधा चंद्रन की कहानी यह साबित करती है कि मजबूत हौसला बड़ी से बड़ी बाधा को पार कर सकता है. वह न आज केवल एक सफल अभिनेत्री नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का प्रतीक भी बन चुकी हैं.

ये भी पढ़ें- पाकिस्तान में जन्मीं ये दो एक्ट्रेस, 90s में बताया गया एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी, आज दोनों फिल्मों से गायब

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com