Ghaziabad Triple Suicide: आज के डिजिटल युग में मोबाइल गेम्स सिर्फ मनोरंजन नहीं रहे, बल्कि कई मामलों में जानलेवा साबित हो रहे हैं. हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन सगी बहनों (12, 14 और 16 साल) ने एक टास्क-बेस्ड कोरियन लवर गेम की लत के चलते 9वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली. उनके आखिरी शब्द थे 'सॉरी पापा'. पुलिस जांच में सामने आया कि गेम के टास्क ना पूरा करने पर मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि बच्चे कदम उठाने को मजबूर हो गए. इसी तरह ब्लू व्हेल जैसे चैलेंज गेम्स पहले भी कई युवाओं की जान ले चुके हैं. इस बढ़ती समस्या को लेकर हॉलीवुड कई बार चेतावनी दे चुका है. कई फिल्में अब मोबाइल ऐप या ऑनलाइन गेम की खतरनाक दुनिया को स्क्रीन पर ला रही हैं. आइए जानते हैं ऐसी ही पांच फिल्मों के बारे में...
1. 2019 की हॉरर फिल्म काउंटडाउन में एक ऐप मौत का समय बताती है और यूजर को मार डालती है, यह फिल्म आज के गेमिंग एडिक्शन को बखूबी दर्शाती है.
2. इसी तरह नर्व (2016) में एक डेयर-बेस्ड ऑनलाइन गेम सामान्य चैलेंज से जानलेवा मुकाबले में बदल जाता है. एडिक्शन, पीयर प्रेशर और रिस्क की लत को बखूबी दिखाती है.
3. स्टे अलाइव (2006) में एक वीडियो गेम दिखाया गया है जहां गेम में मरने पर रियल लाइफ में भी मौत हो जाती है. गेमर्स की लत और वर्चुअल-रियल ब्लर को लेकर क्लासिक हॉरर फिल्म है.
4. ब्रेनस्कैन (1994) में वीआर-स्टाइल हॉरर गेम को लेकर है जो प्लेयर से रियल मर्डर करवाता है और कंसीक्वेंस देता है. एडिक्शन को लेकर पुरानी लेकिन पावरफुल फिल्म है.
5. चूज और डाई (2022) इसमें 80s के एक पुराना हॉरर गेम फिर से खेलने पर रियलिटी में खतरनाक श्राप आ जाता है. एडिक्शन और पुराने गेम्स की डरावनी दुनिया।
ये फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सोसाइटी के लिए अलार्म हैं क्योंकि मोबाइल गेम्स में टास्क, रिवार्ड और पनिशमेंट का सिस्टम बच्चों समेत किसी के भी दिमाग को कंट्रोल करता है. ऐसे में गेमिंग की दुनिया मजेदार होने के साथ ही खतरनाक भी है.
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