आमिर खान को आज मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहा जाता है. लेकिन एक दौर था जब उनकी बॉय नेक्स्ट डोर वाली इमेज ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. खासकर महिला फैंस उनके पीछे पागल थी. खून से चिट्ठियां लिखा करती थीं और अपने कमरे में उनकी तस्वीर लगाया करती थी. 38 साल पहले आई आमिर खान की एक फिल्म ने बॉलीवुड में नया ट्रेंड सेट किया था. एक्शन फिल्मों के दौर के बाद इसी फिल्म ने रोमांटिक फिल्म और युवा लव स्टोरी का ट्रेंड शुरू किया.
हम 1988 में आई फिल्म कयामत से कयामत तक की बात कर रहे हैं. इस फिल्म ने रोमांस का नजरिया बदल दिया और हिंदी फिल्मों के हीरो की छवि को 'रंबो' जैसे रफ-टफ अंदाज़ से बदलकर 'बॉय-नेक्स्ट-डोर' जैसा बना दिया, जिसके लिए स्कूल की लड़कियां खून से खत लिखती थीं और अपने बेडरूम की दीवारों पर उसकी तस्वीरें लगाती थीं. 80 के दशक के युवाओं पर इस फिल्म ने बड़ा असर डाला था, ये फिल्म बॉलीवुड के लिए एक मील का पत्थर बन गई. युवाओं के प्यार की कहानी, जिसे युवाओं ने ही बनाया और युवाओं के लिए ही बनाया.
आमिर-जूही रातों रात बन गए स्टार
इस फिल्म ने न्यूकमर आमिर खान और जूही चावला को रातों-रात स्टार बना दिया और रोमांस का एक ऐसा ट्रेंड शुरू किया जो 90 के दशक तक चलता रहा. इस फिल्म ने युवा रोमांस और हैंडसम हीरो का ट्रेंड शुरू किया. 80 का दशक ऐसा समय था जब अमिताभ बच्चन और उनके 'एंग्री यंग मैन' वाले किरदार अब पुराने हो रहे थे. इस फिल्म ने आमिर खान के करियर को जबरदस्त शुरुआत दी और उनके बॉय नेक्स्ट डोर वाले इमेज को एस्टेब्लिश किया. फिल्म की कहानी रोमियो और जूलियट की कहानी से इंस्पायर्ड बताई जाती है.
फिल्म का शानदार म्यूजिक
आनंद-मिलिंद का म्यूजिक और उदित नारायण की आवाज ने इस फिल्म में जान डाल दी थी. आमिर खान का गाना 'पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा' न केवल उस समय जबरदस्त रहा, बल्कि आज तक वह लोगों का फेवरेट बना हुआ है. यह उस जमाने के हर कॉलेज स्टूडेंट और युवा की जुबां पर रहता था. ये ही वो गाना है जिसने उदित नारायण के करियर में जान भर दी और उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया. इसके अलावा, 'अकेले हैं तो क्या गम है' और 'ऐ मेरे हमसफर' जैसे गानों ने इस मूवी को रोमांटिक म्यूजिकल लव स्टोरी बना दिया.
फिल्म ने की 5 गुना कमाई
फिल्म को मंसूर खान ने डायरेक्ट किया था. इसी फिल्म से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया था. इसे नासिर हुसैन ने लिखा और प्रोड्यूस किया था. ये फिल्म आमिर खान की भी डेब्यू फिल्म थी. फिल्म का संगीत आनंद-मिलिंद ने दिया है और गाने मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे हैं. इस फिल्म को 1.2 करोड़ के बजट में बनाया गया था और इसने 5 करोड़ से अधिक की कमाई की थी.
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