सलमान खान (Salman Khan) बॉलीवुड के भाईजान हैं. सिनेमा के दबंग है और फैन्स के बीच मोस्ट वॉन्टेड है. सलमान खान का स्वैग ही उनकी शान है. उनका बिंदास अंदाज ही फैन्स को सिनेमाघरों तक लेकर आता है. सलमान खान वो सुपरस्टार हैं जो एक्टिंग से ऊपर हैं, और जो वो परदे पर कर देते हैं, वही छा जाता है. भाईजान ने जब तक इसे फॉर्मूले को अपनाया, बॉक्स ऑफिस पर उन्हें कोई छू नहीं पाया. लेकिन भाईजान जैसे ही रियलिस्टिक सिनेमा के करीब जाने लगे तो कामयाबी भी उनसे दूर छिटकने लगी. अब वही भाईजान अगर किसी शहीद की बायोपिक करें तो भाईजान के लिए आसान होगा?

भाईजान की फिल्मोग्राफी देखकर तो इसका जवाब ना में ही मिलता है. भाईजान ने जय हो, भारत, किसी का भाई किसी की जान और फिर सिकंदर जैसी फिल्में करके इस बात को साबित कर दिया कि अगर उनसे एक्टिंग करवाने की कोशिश की जाएगी तो वो सारा गुड़-गोबर कर देंगे. जय हो में भाईजान एक अच्छे मैसेज के साथ आए. लेकिन फिल्म फ्लॉर रही है. किसी का भाई किसी की जान में भी उनका अंदाज दिलों में नहीं उतर सका. फिर सिकंदर का हश्र तो सबको मालूम ही है.

बैटल ऑफ गलवान में सलमान खान
बात करें बैटल ऑफ गलवान की जो अब 'मातृभूमि (Maatrubhumi)' बन चुकी है. इसकी रिलीज डेट का अभी तक कोई ठिकाना नहीं है. पहले इसे अप्रैल में रिलीज किया जाना था. लेकिन अपूर्वला लाखिया की इस फिल्म को लेकर मेकर्स चुप्पी साधे हुए हैं. अब कहा जा रहा है कि फिल्म अगस्त में रिलीज हो सकती है. इस बारे में तभी कुछ कहा जा सकेगा जब कुछ फाइनल होगा.

अब बात करें इसके टाइटल की तो फिल्म का टाइटल बदल गया है. बेशक डायरेक्टर इसकी कोई भी वजह दें, लेकिन ऐसा लगता है कि किसी तरह के विवाद से बचने के लिए इस कदम को उठाया गया है. इस तरह बैटल ऑफ गलवान अब मातृभूमि बन चुकी है.
कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि भाईजान ने उस जॉनर में हाथ डाल दिया है जिसके लिए वह कतई परफेक्ट नहीं हैं., यही वजह है कि बायोपिक अब भायोपिक (भाईजान को जोड़कर बनाया गया शब्द) बनती जा रही है. फिल्म का टाइटल बदला जा रहा है. रिलीज डेट का पता नहीं. बायोपिक में ईद के गाने डालकर त्योहार को कैश कराया जा रहा है. अब भाईजान को समझ नहीं आ रहा है कि इस फिल्म का करें क्या?
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