90 के दशक के सुपरहिट गायक कुमार शानू ने हाल ही में कहा था कि जब दुबई में एक अंडरवर्ल्ड डॉन की पार्टी में उनसे परफॉर्म करने के लिए कहा गया तो उन्हें अपनी जिंदगी को लेकर 'डर' लग गया था. शानू ने कहा कि उनके पास प्रदर्शन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. उस उथल-पुथल भरे समय के बारे में बात करते हुए जब अंडरवर्ल्ड का हिंदी फिल्म इंडस्ट्री पर सीधा नियंत्रण था. कुमार सानू ने कहा कि उन्हें अपनी जान का डर था. कुमार शानू ने अपने पॉडकास्ट पर सुभोजित घोष से कहा, "डर तो लगा था, क्योंकि उस समय कुछ चल रहा था - ऐसा एक सिस्टम था."
इस पर पॉडकास्टर ने जवाब दिया, ''गुलशन कुमार की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.''
भयावह समय को याद करते हुए कुमार सानू ने कहा, "बहुत सारी चीजें हमारे सामने घट गई थीं, तो डर भी लगता था. लेकिन हम कोशिश करते थे समझने-बुझाने की. उसके बदले में वो कुछ मांगते थे - 'आप आके यहां पे गाना गा दो.' हमने जाके गा दिया. उसके बाद जो हमारे फैन बन जाते हैं ना,'' (मुस्कुराते हुए), ''फिर वो बोलता है, 'तेरे को कुछ अगर करे तो बोलना, हम देख लेंगे.' मैं कहता था, 'मुझे देखने की जरूरत नहीं है, मैं अपना ध्यान खुद रख लूंगा' "मेरी आंखों के सामने बहुत कुछ हुआ, इसलिए मैं डर गया था, लेकिन मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की.
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बता दें कि पिछले साल, कुमार सानू ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपने व्यक्तित्व और पब्लिसिटी अधिकारों (जिसमें उनका नाम, आवाज, गाने का अंदाज और तकनीक शामिल है) की सुरक्षा के लिए अपील की थी. जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई कर सकते हैं.
कुमार सानू का करियर कई दशकों का रहा है. वे 'एक सनम चाहिए' — आशिकी (1990), 'दिल का आलम' — आशिकी (1990), 'धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना' — आशिकी (1990), 'चुरा के दिल मेरा' — मैं खिलाड़ी तू... जैसे गानों के लिए जाने जाते हैं.
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