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'अत्याचारी सास' की आपबीती, हीरोइन बनने के सपने को एक थप्पड़ ने किया चकनाचूर, मुंह के कैंसर से गई जान

इस एक्ट्रेस ने अपने फिल्मी करियर में करीब 700 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा समय तक अभिनय करियर रखने वाली महिला अभिनेता के रूप में दर्ज हुआ.

'अत्याचारी सास' की आपबीती, हीरोइन बनने के सपने को एक थप्पड़ ने किया चकनाचूर, मुंह के कैंसर से गई जान
आज के दिन इस दुनिया को अलविदा कह गई थीं ललिता पवार
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नई दिल्ली:

बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी एक्टिंग इतनी दमदार होती है कि लोग उन्हें हमेशा याद रखते हैं. उनमें से एक नाम  हैं ललिता पवार. उनकी एक्टिंग इतनी दमदार होती थी कि उनका किरदार लोगों के जहन में बस जाता था. छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी उनके नेगेटिव किरदारों से डरते थे. लेकिन असल जिंदगी में ललिता एक बेहद मेहनती अभिनेत्री थीं.  

आज हम उनकी पुण्यतिथि के मौके पर ललिता के चुनौतीपूर्ण सफर के बारे में बात करेंगे, जिसमें उन्होंने बाल कलाकार से लेकर बॉलीवुड की सबसे अत्याचारी सास बनने तक की यात्रा तय की. ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था. उनका असली नाम अंबा लक्ष्मण राव सगुन था. उनके पिता रेशम व्यापारी थे और मां घर संभालती थीं. बचपन से ही ललिता को एक्टिंग का शौक था और उनकी प्रतिभा को देखकर उनके माता-पिता ने उन्हें फिल्मों में कदम रखने की इजाजत दी.

ललिता ने महज 9 साल की उम्र में अपनी पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' (1928) से करियर की शुरुआत की. उस समय भारत में फिल्में मूक युग की थीं, लेकिन ललिता ने छोटी सी उम्र में अभिनय की बारीकियां दिखाईं. बाल कलाकार के रूप में उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, और यही उनकी फिल्मी दुनिया की शुरुआत थी.

समय के साथ ललिता ने बड़ी हीरोइन बनने की ठानी, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे ने उनकी जिंदगी का रास्ता बदल दिया. 1942 में रिलीज हुई फिल्म 'जंग-ए-आजादी' की शूटिंग के दौरान, एक सीन में को-एक्टर को उन्हें थप्पड़ मारना था. उस एक्टर ने ललिता को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि वह फर्श पर गिर पड़ी, उनकी आंख की नस फट गई और शरीर के एक हिस्से में लकवा मार गया. इसके कारण उन्हें कुछ सालों तक फिल्मों से दूर रहना पड़ा और उनका हीरोइन बनने का सपना अधूरा रह गया.

लेकिन ललिता ने हार नहीं मानी. उन्होंने खुद को नए किरदारों के लिए ढाला और साइड किरदार और खलनायिका की भूमिकाओं में अपनी पहचान बनाई. उनकी दमदार एक्टिंग के चलते दर्शक उन्हें 'अत्याचारी सास' और क्रूर महिला के रूप में पहचानने लगे. खासकर रामानंद सागर की रामायण में मंथरा का किरदार उनके करियर का अहम मोड़ बन गया. मंथरा के किरदार ने उन्हें घर-घर में प्रसिद्ध कर दिया और उनकी खलनायिका की छवि को और मजबूत किया.

ललिता पवार ने अपने लंबे करियर में लगभग 700 फिल्मों में काम किया, जिनमें हिंदी, मराठी और गुजराती फिल्में शामिल थीं. उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में इतनी मेहनत और स्थिरता दिखाई कि उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा समय तक अभिनय करियर रखने वाली महिला अभिनेता के रूप में दर्ज हुआ. बॉलीवुड की दुनिया में सफलता के बावजूद ललिता का जीवन हमेशा आसान नहीं रहा. मुंह के कैंसर के कारण 24 फरवरी 1998 को उनका निधन हो गया.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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