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‘हनुमान अंश’ के सेट पर थे सख्त नियम, न कोई देगा गाली, न चलेगी शराब और नॉन-वेज, जानिए क्यों लिया गया ऐसा फैसला

‘हनुमान अंश’ की शूटिंग सिर्फ एक फिल्म की तरह नहीं हुई, बल्कि सेट पर आध्यात्मिक माहौल बनाए रखने के लिए कलाकारों और क्रू ने खास अनुशासन का पालन किया, जिसका असर अब बॉक्स ऑफिस पर भी दिखाई दे रहा है.

‘हनुमान अंश’ के सेट पर थे सख्त नियम, न कोई देगा गाली, न चलेगी शराब और नॉन-वेज, जानिए क्यों लिया गया ऐसा फैसला
हनुमान अंश के सेट पर लागू किए गए थे सख्त नियम

लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने खुलासा किया है कि फिल्म ‘हनुमान अंश' की शूटिंग के दौरान सेट पर आध्यात्मिकता और अनुशासन से जुड़े कई सख्त नियमों का पालन किया जाता था. नीम करोली बाबा की कहानी पर आधारित इस फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर गाली-गलौज, ऊंची आवाज में बहस और लड़ाई-झगड़े पर पूरी तरह रोक थी. इसके अलावा नॉन-वेज खाना और शराब भी सेट पर पूरी तरह प्रतिबंधित थी. चतुर्वेदी ने बताया कि फिल्म की आध्यात्मिक भावना के अनुरूप पूरे माहौल को बनाए रखने की कोशिश की गई थी.

निर्देशक के मुताबिक, शूटिंग के हर दिन की शुरुआत हनुमान चालीसा के पाठ से होती थी और जब भी संभव होता, दिन का अंत भी हनुमान चालीसा के साथ किया जाता था. उनका मानना है कि यह प्रार्थना शूटिंग के दौरान आने वाली कई मुश्किलों को दूर करने में टीम के लिए मददगार साबित हुई.

चतुर्वेदी ने शूटिंग के दिनों को याद करते हुए बताया कि कई बार सुबह 7 बजे की शिफ्ट होने के बावजूद अलग-अलग परेशानियों के चलते कैमरा काफी देर से रोल हो पाता था. ऐसे समय में पूरी टीम हनुमान चालीसा का पाठ करती थी. निर्देशक का विश्वास है कि कहीं न कहीं इन प्रार्थनाओं से उन समस्याओं को हल करने में मदद मिली, जिनका सामना टीम कर रही थी.

उनके लिए यह परंपरा महाराज जी यानी नीम करोली बाबा की शिक्षाओं से भी गहराई से जुड़ी हुई थी. चतुर्वेदी के अनुसार, महाराज जी ने कभी अपने आसपास होने वाली अच्छी चीजों का श्रेय खुद नहीं लिया, बल्कि हमेशा लोगों को भगवान हनुमान और भगवान राम की ओर निर्देशित किया. उनका संदेश भक्ति, सेवा, जरूरतमंदों को भोजन कराने और राम नाम के प्रचार-प्रसार पर केंद्रित था.

यही सोच फिल्म की प्रमोशनल रणनीति में भी दिखाई दी. चतुर्वेदी ने बताया कि जब ‘हनुमान अंश' का प्रचार अभियान शुरू हुआ, तब टीम का मकसद पारंपरिक तरीके से फिल्म का प्रचार करना या सिर्फ दर्शकों से फिल्म देखने की अपील करना नहीं था. इसके बजाय उन्होंने प्रचार अभियान को महाराज जी के संदेश के इर्द-गिर्द रखने का फैसला किया.

इसी सोच के तहत टीम ने आठ बड़े मंगल भंडारों का आयोजन किया और लोगों को भोजन वितरित किया. टीम ने विज्ञापनों के जरिए सिर्फ ‘सेवा' का संदेश देने के बजाय उसे वास्तविक जीवन में उतारने की कोशिश की. चतुर्वेदी का मानना है कि इस पहल ने दर्शकों को फिल्म से स्वाभाविक रूप से जुड़ने में मदद की और उन्हें यह महसूस कराया कि फिल्म की टीम वास्तव में ‘हनुमान अंश' के मूल संदेश को अपने जीवन में अपनाने की कोशिश कर रही है.

अब फिल्म की यह आध्यात्मिक सोच बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार नतीजों के साथ नजर आ रही है. कथित तौर पर करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश' ने महज 10 लाख रुपये की ओपनिंग की थी, लेकिन मजबूत वर्ड ऑफ माउथ के चलते फिल्म ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ ली.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28वें दिन तक फिल्म ने भारत में करीब 72.88 करोड़ रुपये नेट का कलेक्शन कर लिया था, जबकि 29वें दिन के आंकड़ों के बाद इसका भारत में नेट कलेक्शन लगभग 82.88 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. ये आंकड़े टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से बताए गए हैं.

इस तरह बेहद कम बजट और सीमित ओपनिंग के बावजूद ‘हनुमान अंश' 2026 की सबसे बड़ी स्लीपर हिट्स में शामिल होती नजर आ रही है. आध्यात्मिक विषय और मजबूत वर्ड ऑफ माउथ के दम पर फिल्म ने दर्शकों के बीच ऐसी पकड़ बनाई है, जिसने इसे बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कहीं आगे पहुंचा दिया है.

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