गोविंदा की जिंदगी में इन दिनों काफी उथल पुथल चल रही है. पत्नी सुनीता से उनके खराब होते रिश्तों के बीच दोनों ही मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं. अब हाल ही गोविंदा ने अपनी मां को याद किया है. वह अपनी मां के बेहद करीब थे. ABP न्यूज के साथ हाल ही में हुई बातचीत में अभिनेता ने अपने परिवार द्वारा झेली गई मुश्किलों के बारे में बात की. उन्होंने अपनी मां निर्मला देवी द्वारा उन्हें और उनके भाई-बहनों को बड़ा करने के लिए दिए गए असाधारण बलिदानों को याद किया.
सबसे चौंकाने वाली बातों में से एक यह थी कि जीवन के एक कठिन दौर में उन्होंने अपने सिर के बाल और भौहें तक मुंडवा ली थीं. यह फैसला दिखाता है कि अपने परिवार के लिए वह किस हद तक जाने को तैयार थीं. ABP लाइव से बात करते हुए, गोविंदा ने उस समय को याद किया, जब उनके परिवार ने लगभग सब कुछ खो दिया था. अपनी मां के अपना रूप बदलने के फैसले को याद करते हुए गोविंदा ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर वह काम की तलाश में बाहर निकलती हैं, तो लोगों का ध्यान उन पर जा सकता है.
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बेहद खूबसूरत थीं गोविंदा की मां
गोविंदा के अनुसार, उनके पिता ने उनकी मां निर्मला देवी से कहा था कि उनकी खूबसूरती की वजह से लोग उन्हें गलत इरादों से देख सकते हैं. गोविंदा ने याद करते हुए बताया कि उनके पिता ने उनसे कहा था, "निर्मला, तुम बहुत खूबसूरत हो. अगर तुम काम की तलाश में बाहर जाओगी, तो लोग तुम्हें गलत इरादों से देखेंगे." रिपोर्ट के अनुसार, गोविंदा ने बताया कि उनकी मां ने अपने सिर के बाल और भौहें मुंडवा लीं और साधुओं की तरह कपड़े पहनने लगीं. गोविंदा ने आगे कहा कि उनकी मां की प्राथमिकता बिल्कुल साफ थी. वह चाहती थीं कि उनके बच्चे बड़े हों, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी मुश्किलें क्यों न झेलनी पड़ें.
मां के अनुभवों का गोविंदा पर हुआ असर
अभिनेता ने यह भी बताया कि उनकी मां के अनुभवों का उनके जीवन पर क्या असर पड़ा और कैसे इन अनुभवों ने उन्हें आलोचनाओं और लोगों की राय के प्रति अपना नजरिया बनाने में मदद की. अभिनेता ने कहा, “ऐसी मां के बेटे के तौर पर, यह सब क्या है? किसने क्या कहा, किसने क्या दिया? किसी ने कुछ कह दिया, किसी ने कुछ दे दिया. मैं इनमें से किसी भी चीज में शामिल नहीं हूं. बिल्कुल भी नहीं, कहीं से भी नहीं.” गोविंदा ने आगे बताया कि वह लोगों को जज करने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि वे किन हालात से गुजर रहे होंगे. उन्होंने कहा, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं उस तरफ ध्यान ही नहीं देता. मैं ध्यान क्यों नहीं देता? क्योंकि मुझे पता है कि वह इंसान ऐसा क्यों है.”
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गोविंदा ने आगे कहा कि लोगों की प्रतिक्रियाएं अक्सर उनके आस-पास के माहौल, हालात और उन परिस्थितियों से तय होती हैं, जिनमें वे घिरे होते हैं. उन्होंने कहा, “समय, हालात, देश, परिस्थितियां और लोगों की प्रतिक्रियाएं—इन सबके बीच, आज देश में हर कोई किसी न किसी तरह से कहीं न कहीं फंसा हुआ है.” निर्मला देवी का निधन 15 जून 1996 को 69 वर्ष की आयु में हुआ था. वह हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक जानी-मानी गायिका और अभिनेत्री थीं.
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