Doordarshan Ramayan: 1980 के दशक में जब रामानंद सागर की रामायण दूरदर्शन पर टेलीकास्ट हो रही थी, तो पूरा देश उसकी दीवानगी में डूबा हुआ था. सड़कें सुनसान हो जाती थीं, लोग टीवी के सामने जमा हो जाते थे. लेकिन इस महाकाव्य ने एक बार एक दर्शक की जिंदगी में ऐसा मोड़ ला दिया कि बात अस्पताल तक पहुंच गई. रामानंद सागर के पोते शिव सागर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में इस अनोखी घटना का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि जब सीरियल में मेघनाद के चलाए गए ब्रह्मास्त्र से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं और हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए जा रहे होते हैं, उस एपिसोड के दौरान चेन्नई में एक व्यक्ति बेहोश होकर कोमा में चला गया.
दर्शक इतना भावुक और डूबा हुआ था कि लक्ष्मण को बेहोश देखकर उसका शरीर और दिमाग इस सदमे को सहन नहीं कर पाया. परिवार वाले हर संभव इलाज की कोशिश कर चुके थे, लेकिन वह शख्स होश में नहीं आ रहा था. आखिरकार परिवार ने रामानंद सागर की टीम से बात की. उन्होंने अगले एपिसोड की टेप मांगी, जिसमें लक्ष्मण संजीवनी से ठीक हो जाते हैं. टीम ने वह एपिसोड चेन्नई भेज दिया. जब उस शख्स के सामने वह एपिसोड चलाया गया, तो वह धीरे-धीरे कोमा से बाहर आ गया.
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शिव सागर कहते हैं कि उनके दादा रामानंद सागर को लगा कि इस दर्शक को उनके शो के कारण ही सदमा पहुंचा है, इसलिए उन्होंने बिना देरी के एपिसोड उन तक पहुंचाने का फैसला किया. उन्होंने इस पूरे मामले को रामायण की अपार शक्ति और दैवीय कृपा का उदाहरण बताया.
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रामायण का जादू सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं था. यह लाखों-करोड़ों लोगों के दिलों में इतनी गहराई से उतर चुका था कि किरदारों की पीड़ा उनके अपने दर्द जैसी लगने लगी थी. सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा, अरुण गोविल को भगवान राम मानने वाले भक्त और अब यह घटना, रामायण सचमुच एक सांस्कृतिक और भावनात्मक क्रांति बन गई थी. आज भी जब हम उस दौर को याद करते हैं तो समझ आता है कि एक अच्छी कहानी और सच्ची श्रद्धा कितना बड़ा चमत्कार रच सकती है.
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