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4 साल की उम्र में डेब्यू, बड़ा हुआ तो लगा 'पारिवारिक हीरो' का टैग, एक्शन-मसाला फिल्मों के दौर में बदलनी पड़ी करियर की दिशा

इस एक्टर ने एक्टिंग, सिंगिंग, डायरेक्शन, होस्टिंग समेत इंडस्ट्री से जुड़ा हर एक काम किया है. ये वो सितारे हैं जिन्होंने कम उम्र में मीना कुमारी और संजीव कुमार जैसे लीजेंड्री कलाकारों के साथ काम किया.

4 साल की उम्र में डेब्यू, बड़ा हुआ तो लगा 'पारिवारिक हीरो' का टैग, एक्शन-मसाला फिल्मों के दौर में बदलनी पड़ी करियर की दिशा
सचिन पिलगांवकर 17 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाते हैं
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नई दिल्ली:

भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने सिर्फ एक दौर में नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों के साथ अपनी पहचान बनाई. सचिन पिलगांवकर भी उन्हीं कलाकारों में से एक हैं. उन्होंने जब फिल्मों की दुनिया में कदम रखा, तब उनकी उम्र महज 4 साल थी. जिस उम्र में बच्चे स्कूल जाना और खिलौनों से खेलना सीखते हैं, उस उम्र में सचिन कैमरे के सामने अपना हुनर दिखा रहे थे. बाल कलाकार के तौर पर दो बार नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले सचिन आगे चलकर हीरो बने, फिर डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, लेखक और सिंगर के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई.

बचपन में ही जीता नेशनल अवॉर्ड

17 अगस्त 1957 को मुंबई में जन्मे सचिन पिलगांवकर मूल रूप से गोवा से जुड़े परिवार से आते हैं. उनके पिता फिल्म और प्रिंटिंग के कारोबार से जुड़े थे. सचिन को बचपन से ही फिल्मों का माहौल मिला और यही माहौल आगे चलकर उनके करियर की नींव बना. सचिन ने साल 1962 में मराठी फिल्म 'हा माझा मार्ग एकला' से बतौर बाल कलाकार डेब्यू किया. फिल्म में उनकी एक्टिंग को इतना पसंद किया गया कि उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट से सम्मानित किया गया. इसके बाद सचिन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने बाल कलाकार के तौर पर करीब 65 फिल्मों में काम किया. 'ज्वेल थीफ', 'मझली दीदी', 'ब्रह्मचारी', 'चंदा और बिजली' और 'मेला' जैसी फिल्मों में नजर आए. साल 1971 में मराठी फिल्म 'अजब तुझे सरकार' के लिए उन्हें दूसरी बार नेशनल अवॉर्ड मिला.

मीना कुमारी से सीखी उर्दू

कहते हैं कि सचिन ने फिल्मों से सिर्फ एक्टिंग ही नहीं सीखी, बल्कि अपने आसपास के बड़े कलाकारों से बहुत कुछ सीखा. मीना कुमारी से उन्होंने उर्दू के उच्चारण सीखे, संजीव कुमार से अभिनय की बारीकियां समझीं और निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से फिल्म एडिटिंग का हुनर जाना.

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साल 1975 में उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ आया. इसी साल वह फिल्म 'शोले' में नजर आए. फिल्म में उनका किरदार छोटा था, लेकिन कहानी के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण था. इसी साल उनकी फिल्म 'गीत गाता चल' रिलीज हुई. सारिका के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आई और फिल्म की सफलता ने सचिन को एक लोकप्रिय हीरो बना दिया. इसके बाद 'बालिका बधू', 'अंखियों के झरोखों से' और 'नदिया के पार' जैसी फिल्मों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई.

एक्शन-मसाला फिल्मों के दौर ने बढ़ाई मुश्किल

हालांकि सचिन की छवि एक खास तरह के रोमांटिक और पारिवारिक फिल्मों के हीरो की बन गई थी. उस दौर में बॉलीवुड में एक्शन और मसाला फिल्मों का बोलबाला बढ़ रहा था, इसलिए वह बड़े एक्शन स्टार के रूप में स्थापित नहीं हो पाए, लेकिन सचिन ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. 80 के दशक में सचिन ने अपने करियर की दिशा बदलने का फैसला किया. उन्होंने एक्टिंग के साथ-साथ निर्देशन पर ध्यान देना शुरू किया. साल 1982 में उन्होंने 'माई बाप' से निर्देशन की शुरुआत की. इसके बाद 1984 में आई 'नवरी मिले नवऱ्याला' ने उन्हें बतौर निर्देशक बड़ी सफलता दिलाई. इसी फिल्म के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री सुप्रिया सबनीस से हुई, जो आगे चलकर उनकी पत्नी बनीं.

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इसके बाद सचिन ने मराठी सिनेमा में एक के बाद एक शानदार कॉमेडी फिल्में दीं. 'गंमत जम्मत', 'अशी ही बनवा बनवी', 'भुताचा भाऊ' और 'आमच्यासारखे आम्हीच' जैसी फिल्मों ने उन्हें मराठी सिनेमा के बड़े हिटमेकर के तौर पर स्थापित कर दिया.

खासकर 'अशी ही बनवा बनवी' आज भी मराठी सिनेमा की कल्ट कॉमेडी फिल्मों में गिनी जाती है. सचिन ने इस फिल्म में एक्टिंग भी की और निर्देशन भी. फिल्म की जबरदस्त लोकप्रियता ने उनकी कॉमेडी टाइमिंग और डायरेक्शन दोनों को साबित कर दिया. 90 के दशक में सचिन ने फिल्मों के साथ टीवी का रुख किया. उन्होंने लोकप्रिय कॉमेडी शो 'तू तू मैं मैं' का निर्देशन किया, जिसमें उनकी पत्नी सुप्रिया और रीमा लागू नजर आईं. सास-बहू के रिश्ते को मजेदार अंदाज में दिखाने वाला यह शो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ.

बड़े से लेकर छोटे पर्दे तक जमाई धाक

सचिन ने टीवी पर एक्टिंग, निर्देशन, होस्टिंग और रियलिटी शो में जज की भूमिका भी निभाई. फिल्मों की तरह छोटे पर्दे पर भी उन्होंने खुद को एक ही काम तक सीमित नहीं रखा. सचिन और अभिनेत्री सुप्रिया की मुलाकात फिल्म के सेट पर हुई थी और बाद में यह रिश्ता जिंदगी भर का साथ बन गया. दोनों ने कई प्रोजेक्ट्स में साथ काम किया. उनकी बेटी श्रेया पिलगांवकर भी अभिनेत्री हैं और उन्होंने अपने पिता की फिल्म 'एकुलती एक' से बड़े पर्दे पर शुरुआत की.

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2015 की मराठी फिल्म 'कट्यार काळजात घुसली' में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर मराठी अवॉर्ड भी मिला. इसके बाद सचिन पिलगांवकर 'सिटी ऑफ ड्रीम्स' जैसी वेब सीरीज में भी नजर आए. 2024 में उनकी चर्चित फिल्म 'नवरा माझा नवसाचा 2' भी आई.

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