एक रोमांटिक गाना लिखते हुए किस तरह का माहौल होता है. अगर आपसे इस बारे में बात की जाए तो यकीनन आप कहेंगे कि शांत खुशनुमा माहौल, मधुर संगीत और एकांत कुछ इस तरह का माहौल तो चाहिए ही तभी दिमाग में माशूका या माशूक के लिए कोई गाना या कुछ खूबसूरत अल्फाज दिमाग में आ सकते हैं लेकिन हर बार सिचुएशन ऐसी नहीं होती. कभी कभी रोमांटिक गाने के पीछे डर का साया भी होता है. अगर आप इस कनेक्शन से कनफ्यूज हो बैठे हैं तो जावेद अख्तर का ये किस्सा जरूर पढ़िए. जावेद साहब ने खुद बताया था कि क्लासिक रोमांटिक गानों में से एक 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' उन्होंने किन हालात में लिखा था.
रोमांटिक गाना था बड़ी चुनौती
इंडिया टुडे के साथ एक खास बातचीत में अख्तर ने बताया कि कैसे उन्होंने खुद को बचाने के लिए जल्दबाजी में ये गाना लिखा था और दिमाग में बस यही डर था कि कहीं उन्हें फिल्म से निकाल ना दिया जाए. दरअसल शुरुआत में विधु विनोद चोपड़ा और आरडी बर्मन को लगा था कि फिल्म '1942: ए लव स्टोरी' (1994) में गाने की कोई गुंजाइश नहीं है. बिना किसी सिचुएशन या धुन के जावेद अख्तर ने चुनौती स्वीकार की और एक ऐसा शानदार गाना लिखने का फैसला किया जो फिल्म में अपनी जगह बना सके.
अख्तर ने चोपड़ा और बर्मन की बातचीत को याद करते हुए कहा, "जब हमने स्क्रिप्ट सुनी तो गाने के लिए कोई सिचुएशन नहीं थी. मैंने जोर दिया कि हमें कम से कम एक गाना तो रखना ही चाहिए." उन्होंने एक शर्त भी रखी कि अगर अख्तर उन्हें कोई शानदार गाना दे सकें तो वे उस पर विचार कर सकते हैं.
गाने की चुनौती लेकर भूल गए जावेद अख्तर!
चुनौती यह थी कि जावेद अख्तर के पास काम करने के लिए न तो कोई धुन थी और न ही कोई सिचुएशन और तो और, वह इस काम के बारे में लगभग भूल ही गए थे. उस घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मीटिंग से निकलने के बाद मैं भूल गया था. अपॉइंटमेंट से दो घंटे पहले... बुधवार का दिन था. चर्चा शनिवार को हुई थी. आरडी के आदमी ने मुझे फोन किया और शाम 4 बजे गाना लाने के लिए कहा." उन्होंने याद किया कि एक तरफ सभी उनका इंतजार कर रहे थे तो अचानक उन्हें पूरे कमरे के सामने फेल होने का डर सताने लगा. उन्होंने कहा, "मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं. मुझे लगा कि मेरी तो नाक कट जाएगी."
कार चलाते चलाते दिमाग में आए बोल
दबाव के उसी पल में 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' गाने का आइडिया आकार लेने लगा. अख्तर को आज भी अच्छी तरह याद है कि जब उन्हें यह गाना सूझा, तो वह कार चला रहे थे. इसके बाद अख्तर को एक अनोखा आइडिया आया. उन्होंने पूरे गाने को उपमाओं पर लिख दिया. उन्होंने 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' से शुरुआत करने और गाने को उसी अंदाज में आगे बढ़ाने का सुझाव दिया. यह विचार मान लिया गया और अख्तर अंतरा लिखने बैठ गए.
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इसके बाद जो हुआ, वह लगभग तुरंत हो गया. अख्तर ने गाने के बोल बर्मन को सौंपे, जिन्होंने उन्हें लिखा और तुरंत गाना शुरू कर दिया. अख्तर के मुताबिक असल में गाना इसी तरह तैयार हुआ. उनसे अक्सर पूछा जाता है कि उन्हें इसे लिखने की प्रेरणा कहां से मिली. उनका जवाब आम जवाबों से बिल्कुल अलग होता है और वह है "यह डर था. मुझे डर था कि वे मुझे फिल्म से निकाल देंगे."
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