फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे स्टार्स हैं, जो शादी कर अपना घर नहीं बसा सके. इसमें एक नाम उस वेटरन एक्ट्रेस का भी शामिल है, जो जुबली गर्ल के नाम से मशहूर हुई थी. कई बार शादी की बात होते हुए भी अंजाम तक नहीं पहुंची और फिर दिमाग से इसका ख्याल ही निकाल दिया. इस अदाकारा से कपूर खानदान के सुपरस्टार शशि कपूर बुर्का पहनकर मिलने पहुंचे थे. इस दिग्गज अभिनेत्री को स्टार मेटरियल नहीं कहकर फिल्म से निकाल दिया गया था. यह एक्ट्रेस धर्मेंद्र और राजेश खन्ना समेत कई सुपरस्टार संग ब्लॉकबस्टर फिल्म दे चुकी है. चलिए जानते हैं इस अदाकारा के बारे में.

100 से ज्यादा फिल्मों में किया काम
बात कर रहे हैं आशा पारेख की. हिंदी सिनेमा की वेटरन एक्ट्रेस आशा पारेख उन स्टार्स में शुमार हैं, जिन्होंने शादी नहीं रचाई. अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. इसमें ज्यादातर वह बतौर एक्ट्रेस नजर आईं. उनकी सुपरहिट फिल्मों में तीसरी मंजिल, कटी पतंग, लव इन टोक्यो और कन्यादान समेत कई फिल्में शामिल हैं. एक समय था जब वह हिंदी सिनेमा की हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस की लिस्ट में शुमार थीं. एक्टिंग के अलावा उन्होंने सीरियल को डायरेक्ट और प्रोड्यूस भी किया. इंडियन सिनेमा में उनके योगदान के चलते उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया था.

इस फिल्म से चमकी किस्मत
आशा पारेख डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन एक ट्रेन हादसे को देखने के एक्ट्रेस ने मन बदल लिया. उन्हें बचपन से डांस का शौक था. बिमल रॉय ने उन्हें एक शो में स्टेज पर डांस करते हुए देखा और साल 1952 में आई फिल्म मां में उन्हें चाइल्ड आर्टिस्ट का रोल दिया. इसके बाद आशा ने पहले पढ़ाई पूरी की और फिर 16 की उम्र में फिल्मों में आ गई. फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' के लिए उन्हें स्टार मटेरियल नहीं है कहकर रिजेक्ट कर दिया था. फिर 1959 में फिल्म दिल देकर देखो में नजर आई और रातों-रात स्टार बन गईं.

जुबली गर्ल का मिला टैग
आशा ने 60 से 70 के दशक में लगातार कई हिट फिल्में दी, जिसकी वजह उन्हें जुबली गर्ल का टैग मिला. एक्ट्रेस ने बताया था कि उन्हें बोरियों में भरकर फैंस के लेटर आते थे. एक्ट्रेस का एक चीनी फैन भी था, जो उन पर नजर रखता था. जब उससे पूछताछ हुई तो कहा कि वह एक्ट्रेस से शादी करने आया है. इसके बाद एक्ट्रेस ने पुलिस को सूचना दी और उसे ऑर्थर रोड जेल जाया गया. बता दें, आशा 1998 से 2001 तक सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन यानी सेंसर बोर्ड की पहली महिला चेयरपर्सन बनी थीं.
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