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This Article is From Mar 10, 2026

लड़की से कैसे कहें दिल की बात, कैसे काबू करें जज्बात, 50 साल पुरानी इस फिल्म में अशोक कुमार ने सिखाई थी काम की बात- पता है मूवी का नाम

करीब 50 साल बाद भी यह फिल्म इसलिए खास है क्योंकि लोगों की झिझक आज भी वही है. यह फिल्म सिखाती है कि डर आना गलत नहीं है, लेकिन डर के कारण पीछे हट जाना सही नहीं. अगर आप भी दिल की बात कहने में हिचकते हैं, तो छोटी सी बात आज भी आपको हिम्मत देने वाली फिल्म है.

लड़की से कैसे कहें दिल की बात, कैसे काबू करें जज्बात, 50 साल पुरानी इस फिल्म में अशोक कुमार ने सिखाई थी काम की बात- पता है मूवी का नाम
50 साल पुरानी इस फिल्म में अशोक कुमार ने सिखाई थी काम की
नई दिल्ली:

यूं तो बॉलीवुड की फिल्में अपनी बेहतरीन लवस्टोरीज के लिए जानी जाती है. बीते कुछ सालों में बॉलीवुड में कई ऐसी रोमांटिक और लव स्टोरी वाली फिल्में बनी जिनकी कई बार कहानी और कई बार स्टार कास्ट की बेहतरीन एक्टिंग ने दर्शकों को रुला डाला. लेकिन आज हम आपको 50 साल पुरानी एक ऐसी फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं जो साफ सुथरी रोमांटिक फिल्म की एक मिसाल है. इस फिल्म की कहानी और स्टार कास्ट की एक्टिंग इतनी दमदार थी कि आज भी लोग इसे भूले नहीं हैं. हम बात कर रहे हैं 50 साल पहले आई फिल्म 'छोटी सी बात' की.

प्यार है, लेकिन कहने की हिम्मत नहीं
फिल्म की कहानी अरुण और प्रभा के इर्द-गिर्द घूमती है. अरुण प्रभा से बहुत प्यार करता है, लेकिन हर बार कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है कि वह अपने दिल की बात नहीं कह पाता. बस स्टॉप, ऑफिस और रोजाना की छोटी-छोटी घटनाएं उसकी उलझन को और बढ़ा देती हैं. यही कारण है कि लोग खुद को अरुण की जगह रखकर सोचने लगता है.

कमेंट्री और डायलॉग्स जो कहानी को खास बनाते हैं
छोटी सी बात की सबसे बड़ी खासियत इसकी कमेंट्री है. कमलेश्वर की आवाज में चलने वाली टिप्पणी सीधे अरुण के मन की बात कहती है. वहीं शरद जोशी के लिखे डायलॉग्स फिल्म को हल्का, आसान और यादगार बनाते हैं. फिल्म बिना शोर-शराबे के भी गहरी बात कह जाती है.

नागेश शास्त्री और आत्मविश्वास का फर्क
फिल्म में असरानी का किरदार नागेश शास्त्री अरुण के बिल्कुल उलट है. वह आत्मविश्वास से भरा हुआ है, तेज बोलता है और बिना झिझक अपनी बात रखता है. उसका स्कूटर और अंदाज अरुण को और ज्यादा कमजोर महसूस कराता है. इस टकराव में अरुण की परेशानी साफ दिखाई देती है.

अशोक कुमार और जिंदगी की सीख
अशोक कुमार का किरदार कर्नल जूलियस नागेंद्रनाथ विल्फ्रेड सिंह कहानी में नया मोड़ लाता है. वह अरुण को खुद पर भरोसा करना सिखाते हैं. उनके शब्द और एक्सपीरियंस अरुण का हौसला बढ़ाते हैं और उसे आगे बढ़ने की ताकत देते हैं.

क्यों आज भी जरूरी है ‘छोटी सी बात'
करीब 50 साल बाद भी यह फिल्म इसलिए खास है क्योंकि लोगों की झिझक आज भी वही है. यह फिल्म सिखाती है कि डर आना गलत नहीं है, लेकिन डर के कारण पीछे हट जाना सही नहीं. अगर आप भी दिल की बात कहने में हिचकते हैं, तो छोटी सी बात आज भी आपको हिम्मत देने वाली फिल्म है.
 

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