वो दौर जब अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना एक दूसरे के राइवल कहे जाते थे. लेकिन अमर अकबर एंथनी, परवरिश, हेरा फेरी और खून पसीना जैसी फिल्मों से 70 के दशक में उन्होंने राज किया. फिल्मों में उनकी दोस्ती दर्शकों को खूब एंटरटेन करती थी. हालांकि यह जोड़ी 48 साल पहले उस आखिरी फिल्म में नजर आई, जिसके डायलॉग खुद एक्टर कादर खान ने लिखे थे. वहीं इस फिल्म से जुड़ा एक किस्सा है कि जब कादर खान ने 14 पन्नों में लिखे सीन के डायलॉग बिग बी को सुनाए तो वह इमोशनल हो गए. इस फिल्म में 7 गाने थे, जिन्हें किशोर कुमार और आशा भोसले जैसे दिग्गज सिंगर्स ने आवाज दी थी और कल्ट बना दिया.
अमिताभ बच्चन-विनोद खन्ना की आखिरी फिल्म
यह फिल्म थी मुकद्दर का सिकंदर, जो 48 साल पहले रिलीज हुई थी. फिल्म को प्रकाश मेहरा ने डायरेक्ट किया था और कादर खान ने इसके डायलॉग लिखे थे. कास्ट में अमिताभ बच्चन, राखी, अमजद खान, कादर खान, विनोद खन्ना, रंजीत, रेखा, निरूपा रॉय, राम पी सेठी अहम किरदार में नजर आए थे. वहीं यह आखिरी बार था जब बिग बी और विनोद मेहरा पर्दे पर साथ नजर आए थे.
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14 पन्नों में कादर खान ने पिरोया निजी दर्द
कादर खान के लिखे डायलॉग्स की ताकत का एक बड़ा उदाहरण 1978 में रिलीज हुई फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' का 16 पन्नों वाला सीन है, जो ओ साथी रे गाने के पहले फिल्माया गया था. कादर खान ने इस सीन में अपने जीवन के अनुभवों को उतार दिया था. जब उन्होंने अमिताभ बच्चन को इसे सुनाया तो बिग बी इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों में आंसू आ गए. कादर खान ने फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' से जुड़ा किस्सा बताते हुए कहा था कि फिल्म में एक सीन था, जिसमें अमिताभ बच्चन का किरदार स्टेज पर अपनी जिंदगी की कहानी सुनाता है. इस सीन को लिखते समय कादर खान ने अपने निजी जीवन के अनुभवों को भी शामिल किया था. यही वजह थी कि वह इस सीन को लेकर काफी भावुक थे. जब उन्होंने इसे फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर प्रकाश मेहरा को सुनाया तो वह भी भावुक हो गए थे.
लेकिन जब यह स्क्रिप्ट अमिताभ बच्चन तक पहुंची तो 16 पन्नों का सीन देखकर वह हैरान रह गए. उन्हें लगा कि इतने लंबे डायलॉग याद करना और उन्हें पर्दे पर सही भाव के साथ बोलना मुश्किल होगा. उन्होंने सीन को छोटा करने की बात कही. कादर खान उस वक्त दूसरी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे. फिर अमिताभ बच्चन की तरफ से उन्हें बुलावा आया. कादर खान को लगा कि शायद उनके सीन में कोई कमी निकाली गई है, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें अपनी बात समझाने का मौका मिला. कादर खान ने इंटरव्यू में बताया था कि जब वह अमिताभ बच्चन के पास पहुंचे तो उन्होंने सभी को कमरे से बाहर भेज दिया और खुद पूरा सीन पढ़कर सुनाना शुरू किया. जैसे-जैसे कादर खान अपनी जिंदगी से जुड़े अनुभवों को शब्दों में उतारते गए, सीन का इमोशनल असर सामने आता गया.
कादर खान के मुताबिक, पूरा सीन सुनते-सुनते अमिताभ की आंखों में आंसू आ गए. उन्हें समझ आ गया कि ये सिर्फ लंबे डायलॉग नहीं हैं, बल्कि किरदार की जिंदगी और दर्द को बयान करने वाले शब्द हैं. इसके बाद अमिताभ ने कादर खान से कहा कि वह आगे भी अपनी आवाज में सीन रिकॉर्ड करके दिया करें, क्योंकि उनके सुनाने का अंदाज डायलॉग के भाव समझने में मदद करता था.
मुकद्दर का सिकंदर के 7 सुपरहिट गाने
मुकद्दर का सिकंदर में 7 गाने थे, जिसमें ओ साथी रे, दिल तो है दिल, सलाम ए इश्क मेरी जान, मुकद्दर का सिकंदर, प्यार जिंदगी है, जिंदगी तो बेवफा है, वफा जो ना शामिल है. इन गानों को किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोसले, महेंद्र, मोहम्मद रफी और हेमलता ने आवाज दी. जबकि कल्याणजी आनंद जी ने कंपोज किया. इन गानों के गीतकार अनजान थे. जबकि सिर्फ एक गाना सलाम ए इश्क प्रकाश मेहरा ने लिखा था. फिल्म ने 1 करोड़ के बजट में 26 करोड़ कलेक्शन किया था.
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