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22 साल की लड़की मरकर भी रही 900 दिनों तक जिंदा, किडनैपर्स ने किया था ऐसा हश्र, कई दिनों तक दिलोदिमाग पर छाई रहेगी ये कहानी

जुर्म और अपराध वाली कहानी सबसे भयानक होती है. इसमें इंसान कब और कितना वहशी बन जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता है. हमारे आस-पास भी कई ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं, जो रोंगटे खड़े कर देती है.

22 साल की लड़की मरकर भी रही 900 दिनों तक जिंदा, किडनैपर्स ने किया था ऐसा हश्र, कई दिनों तक दिलोदिमाग पर छाई रहेगी ये कहानी
नेटफ्लिक्स की इस डॉक्यूमेंट्री का नाम '900 डेज विदाउट एनाबेल' है

अब तक कई फिल्में और सीरीज दिल दहला देने वाली सच्ची घटनाओं पर बन चुकी हैं. इनमें से एक हम उस कहानी की बात करेंगे, जो किसी की भी रूह कंपा सकती है. इस सीरीज को देखने के बाद आपके लिए इसे लंबे समय तक भुलाना मुश्किल होगा. यह कहानी है उस 22 साल की लड़की की, जो मरकर भी 900 दिनों यानी ढाई साल से भी ज्यादा समय तक जिंदा रही. यह लड़की एक पॉश इलाके में रहती थी और रोजाना जॉगिंग पर जाती थी, लेकिन एक दिन वह जॉगिंग करने गई और फिर कभी वापस नहीं लौटी. ऐसा इस लड़की के साथ क्या हुआ और इसकी मौत कैसे हुई, आइए जानते हैं.

मरकर भी 900 दिनों तक जिंदा

सच्ची घटना पर आधारित नेटफ्लिक्स की इस डॉक्यूमेंट्री का नाम '900 डेज विदाउट एनाबेल' है. इसकी कहानी में दिखाया गया है, कैसे दो किडनैपर कैंडिडो ऑर्टिज और एमिलियो मुनोज ने इस 22 साल की लड़की के परिजनों को सालों तक धोखा दिया. इन दोनों ने इस लड़की के घरवालों को 14 बार फोन किया और 9 लाख डॉलर की फिरौती मांगी. इसके लिए इन दोनों ने फैमिली को जाली ऑडियो टेप भी भेजा, जिसमें मुनोज की पत्नी की एनाबेल की आवाज में चीखती और तड़पती हुई आवाज रिकॉर्ड करती थी. मोनिका पाल मेरो इस डॉक्यूमेंट्री की डायरेक्टर हैं, जो सच्ची घटनाओं को पर्दे पर लाने के लिए जानी जाती हैं.

क्या है कहानी का क्लाइमेक्स

3 एपिसोड वाली इस डॉक्यूमेंट्री के पहले पार्ट में किडनैपिंग और फिरौती की घटना है, दूसरे एपिसोड में पुलिस जांच और नकली ऑडियो की छानबीन और तीसरे में किडनैपर्स की गिरफ्तारी और एनाबेल की लाश मिलने की कहानी है, जो 900 दिनों तक एक वीरान फैक्ट्री में पड़ी हुई थी, क्योंकि किडनैपर्स ने एनाबेल का कत्ल अपहरण के बाद ही कर दिया था. वहीं, किडनैपर्स ने एनाबेल की लाश की आड़ में फिरौती मांगना नहीं छोड़ा, क्योंकि ये दोनों एनाबेल के परिजनों को ऐसे शो करते थे, जैसे कि वो जिंदा हो. यह घटना साल 1995 की है और साल 2024 में इस पर डॉक्यूमेंट्री रिलीज हुई थी. IMDb ने इसे 10 में से 6 रेटिंग दी है. दर्शकों को इस डॉक्यूमेंट्री में सस्पेंस और क्लाइमेक्स अच्छा लगा. इस सीरीज को नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.


 

लेखक के बारे में
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शिखा यादव
Chief Sub Editor
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