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80 साल पहले आई इस फिल्म ने कान्स में लहराया था परचम, भारत में नहीं मिला सम्मान, रिलीज पर लगी बैन

 इस फिल्म को देव आनंद के भाई ने डायरेक्ट किया था और यह उनकी पहली फिल्म थी.

80 साल पहले आई इस फिल्म ने कान्स में लहराया था परचम, भारत में नहीं मिला सम्मान, रिलीज पर लगी बैन
कान्स में परचम लहराने वाली पहली हिंदी फिल्म
नई दिल्ली:

इंडियन फिल्म इंडस्ट्री से कई फिल्में इंटरनेशनल लेवल पर सराही गई हैं और यह सिलसिला आज भी जारी है. कान्स फिल्म फेस्टिवल के जरिए भी कई हिंदी फिल्मों को पॉपुलैरिटी और सम्मान मिला है. कान्स फिल्म फेस्टिवल में दुनियाभर की फिल्म इंडस्ट्री की फिल्मों का प्रीमियर होता है. भारत की कई फिल्में इस फिल्म फेस्टिवल में परचम लहरा चुकी हैं.  कान्स में शुरुआत से ही भारतीय फिल्मों ने अलग छाप छोड़ी है. आज से 80 साल पहले रिलीज नहीं हो सकी इस फिल्म ने भी कान्स में हल्ला मचा दिया था, लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर तालियां बटोरने वाली इस फिल्म को उसके ही वतन में रिलीज नहीं होने दिया था. कान्स में जीत हासिल करने वाली यह पहली हिंदी फिल्म थी.  चलिए जानते हैं आखिर यह फिल्म कौनसी है.

कान्स में अवार्ड जीतने वाली पहली फिल्म
कान्स फिल्म फेस्टिवल में किसी फिल्म का जीतना इतना आसान नहीं होता है, लेकिन यहां किसी भी फिल्म की जीत एक इतिहास बन जाती है. साल 1946 में आई ड्रामा फिल्म नीचा नगर के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. इस फिल्म का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था. इस फिल्म से ही देव आनंद के भाई ने फिल्म निर्देशन में कदम रख था. दिग्गज एक्ट्रेस कामिनी कौशल ने भी इस फिल्म से डेब्यू किया था. नीचा नगर ही इंडियन फिल्म की वह पहली फिल्म है, जिसने कान्स में सबसे पहले परचम लहराया था. नीचा नगर को कान्स में ग्रैंड प्रिक्स फिल्म पुरस्कार मिला था. फिल्म की कहानी बहुत ही मार्मिक थी. यह बहुत संवेदनशील मुद्दे पर बनी फिल्म है, जिसे हर इंसान को देखना चाहिए.

क्या है फिल्म की कहानी?
नीचा अगर एक सोशल ड्रामा फिल्म है, जो सामाजिक मुद्दों पर बनी है. इसमें अमीर और गरीब के बीच का भेदभाव दिखाया गया है. फिल्म में समाज की असल सच्चाई को उजागर किया गया है. लेकिन सोचने और हैरानी वाली बात यह है कि इस फिल्म को भारत में कभी भी रिलीज नहीं किया गया, लेकिन 80 के दशक में इस फिल्म को दूरदर्शन पर दिखाया गया था. कुल मिलाकर इस फिल्म को उसके ही देश में सम्मान नहीं मिला, क्योंकि फिल्म में समाज की कड़वी सच्चाई को सामने लाया गया था. इस फिल्म में संगीत की दुनिया के महान संगीतकार रवि शंकर का म्यूजिक था. फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट में उमा आनंद, कामिनी कौशल, रफीफ अनवर, जोहरा सहगल और मोहन सहगल थे. फिल्म 29 सितंबर 1946 को सिनेमाघरों में रिलीज होनी थी.

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