बांकीपुर उपचुनाव में BJP उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने क्यों छोड़ा मैदान? पिता से कनेक्शन की इनसाइड स्टोरी

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने अभिषेक बंटी की जगह नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है. नामांकन के एक दिन बाद अभिषेक बंटी ने अपना नाम वापस ले लिया. चारा घोटाले से जुड़े पारिवारिक संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं.

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बांकीपुर उपचुनाव: अभिषेक बंटी ने क्यों वापस लिया नामांकन? BJP की रणनीति और चारा घोटाला कनेक्शन की चर्चा
पटना:

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने बड़ा बदलाव करते हुए अभिषेक बंटी की जगह नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है. अभिषेक बंटी ने नामांकन दाखिल करने के एक दिन बाद व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए नाम वापस ले लिया. हालांकि राजनीतिक गलियारों में उनके परिवार के कथित चारा घोटाला कनेक्शन को लेकर चर्चा तेज है. सूत्रों के अनुसार भाजपा को आशंका थी कि विपक्ष इस मुद्दे को चुनाव में उछाल सकता है. इसके बाद पार्टी ने रणनीतिक बदलाव करते हुए नया उम्मीदवार मैदान में उतारा.

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एक दिन पहले भरा था नामांकन 

अभिषेक बंटी ने एक दिन पहले ही नामांकन दाखिल किया था. नामांकन सभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत एनडीए के तमाम बड़े नेता शामिल हुए थे. आज उन्होंने  बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को पत्र लिख कर व्यक्तिगत कारणों से चुनाव लड़ने से असमर्थता जाहिर की. इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने यही बातें दोहराई. इस दौरान वे भावुक थे.

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क्या है वजह?

अभिषेक बंटी के नामांकन वापस लेने के पीछे की एक अहम वजह चारा घोटाले से उनके परिवार का कनेक्शन को बताया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार अभिषेक बंटी के पिता रविन्द्र प्रसाद चारा घोटाले में दोषी थे.

ऐसे में पार्टी को डर था कि प्रशांत किशोर इस मामले को जोर शोर से उठाएंगे और इससे पार्टी को चुनाव में नुकसान होने के साथ - साथ नैरेटिव के लेवल पर भी नुकसान होगा.

सीबीआई कोर्ट ने 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के साथ जिन 75 लोगों को दोषी माना था उनमें रविन्द्र प्रसाद भी शामिल थे. रविन्द्र प्रसाद को 3 साल की सजा सुनाई गई थी. चारा घोटाला के दौरान वे मगध केमिकल कॉर्पोरेशन के मैनेजर थे. वे 139 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में आरोपी बनाये गए थे. सीबीआई ने इस मामले में 2001 से 2003 के बीच 3 चार्जशीट फाइल की थी. 575 गवाह, 4200 डॉक्यूमेंट खंगालने के बाद CBI ने इन्हें आरोपी बनाया था. 

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इसलिए पार्टी बैकफुट पर आ गई

बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को इन आरोपों की जानकारी बाद में मिली. इतना ही नहीं प्रशांत किशोर के पास इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज पहुंच गए थे. भाजपा के नेताओं को इस बात की जानकारी थी कि वह चुनाव में इसे बड़ा मुद्दा बनाएंगे. इसलिए पार्टी बैकफुट पर आ गई. इस दौरान कई अन्य नेताओं को नामांकन कि तैयारी के लिए कहा गया लेकिन आखिरकार एक सामान्य, युवा कार्यकर्ता नीरज सिन्हा को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है.

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