सैलरी 2 लाख...फिर भी जेब खाली! CA का खुलासा क्यों घुट रहा है मिडिल क्लास?

सोचिए, महीने के दो लाख रुपये कमाने के बाद भी जेब खाली क्यों लगती है? मेट्रो शहरों में मिडिल क्लास के लोगों की जिंदगी पर महंगाई और खर्चों का ऐसा साया कि आमदनी भले बढ़े, लेकिन इकट्ठा किया हुआ कम हो ही जाता है. जानिए क्यों दो लाख महीना कमाने वाले भी पैसों के तंग चक्र में फंसे हैं.

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2 लाख महीना कमाने वाला भी परेशान! CA ने बताया मेट्रो सिटी की असली सच्चाई

Middle Class Financial Pressure India: चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन कौशिक ने हाल ही में बताया कि आज के मेट्रो शहरों में 2 लाख रुपये महीने की सैलरी होना भी कई परिवारों के लिए काफी होने की गारंटी नहीं. खासकर प्राइवेट स्कूल की फीस पिछले दशक में 160% बढ़ चुकी है, जो आमदनी के मुकाबले बहुत तेज है. इसके साथ ही मेडिकल खर्च भी हर साल करीब 14% बढ़ रहा है, जो एशिया में सबसे ज्यादा है. मामूली बीमारी या अस्पताल का खर्च भी अब बड़ी आर्थिक परेशानी बन गया है. 

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घर खरीदना भी हुआ मुश्किल (Home Buying Became Difficult)

मुम्बई में घर की कीमत आमदनी से 15 गुना और दिल्ली में 12 गुना हो गई है. इसका मतलब है कि ज्यादातर मिडिल क्लास के लिए घर लेना अब सपने जैसा हो गया है. अगर कोई घर खरीद भी लेता है, तो 20 साल तक लोन के किस्तों में पिसता रहता है. मासिक वेतन का आधा हिस्सा EMIs में चला जाता है.

टैक्स, किराया और बाकी खर्च (Taxes, Rent, and Other Expenses)

CA नितिन के मुताबिक, आम तौर पर 30% आय टैक्स में चला जाता है, 25% किराए में और 20% जरूरी सेवाओं पर खर्च होता है. इस तरह मिडिल क्लास के लिए बचत या अमीरी बनाना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है. यह कहानी दिखाती है कि केवल उच्च वेतन होना वित्तीय आजादी का पैमाना नहीं है. बढ़ती महंगाई और खर्चों के बीच, मिडिल क्लास को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है, जो देश की आर्थिक सेहत के लिए भी चिंताजनक है.

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