लैब में पैदा हुआ, इंसान जैसा था ऑलिवर, एक चिम्पैंजी का राज अमेरिका ने क्यों छिपा दिया?

इंसान जैसा दिखने वाला ‘ह्यूमनज़ी’ ओलिवर कौन था? दो पैरों पर चलने वाले इस रहस्यमयी चिंपैंजी का वायरल वीडियो लोगों को क्यों डरा रहा है, जानिए पूरी कहानी.

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ह्यूमनज़ी’ ओलिवर का डरावना रहस्य

Oliver humanzee: सोशल मीडिया पर हाल ही में एक पुराना वीडियो फिर से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग सहम उठे हैं. यह वीडियो है ओलिवर नाम के उस चिंपैंजी का, जिसे कभी ‘ह्यूमनज़ी' यानी इंसान और चिंपैंजी के बीच की कड़ी माना गया था. उसकी शक्ल, चाल-ढाल और व्यवहार इतने अलग थे कि लोग उसे देखकर डर भी गए और हैरान भी रह गए.

कौन था ओलिवर?

ओलिवर को साल 1970 में कांगो से पकड़ा गया था. इसके बाद उसे ट्रेनर्स फ्रैंक और जैनेट बर्गर ने अपने पास रखा. ओलिवर बाकी चिंपैंजियों से बिल्कुल अलग दिखता था. उसका सिर छोटा था, चेहरा अपेक्षाकृत चपटा था और नाक उभरी हुई थी. ओलिवर की सबसे डरावनी बात यह थी कि वह चिंपैंजियों की तरह हाथों के बल नहीं, बल्कि इंसानों की तरह सीधे दो पैरों पर चलता था. उसके सिर पर बाल नहीं थे, न ही आम चिंपैंजियों की तरह दाढ़ी या आगे निकला जबड़ा था. उसके कान नुकीले थे और ऊंचाई पर स्थित थे, यहां तक कि उसके चेहरे पर झाइयां भी थीं.

क्या था ‘मिसिंग लिंक'?

कई लोगों को लगा कि ओलिवर इंसान और बंदर के बीच की वह कड़ी है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘मिसिंग लिंक' कहा जाता है. हालांकि वैज्ञानिकों ने इस दावे को खारिज कर दिया. उनका कहना था कि विकास प्रक्रिया सीधी रेखा में नहीं चलती और ओलिवर किसी भी तरह से इंसान-चिंपैंजी का संकर नहीं था.

देखें VIDEO:

वायरल वीडियो ने लोगों को डरा दिया

जब ओलिवर का पुराना फुटेज दोबारा सामने आया, तो सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं डर से भरी रहीं. किसी ने कहा, कि उस चेहरे को देखकर नींद उड़ गई, तो किसी ने उसे अब तक का सबसे डरावना चेहरा बताया. 1975 में ओलिवर को एक वकील को बेच दिया गया, जिसके बाद वह थीम पार्क और फिर प्रयोगशालाओं तक पहुंचा. 1989 में उसे वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए इस्तेमाल किया गया. बाद में जब उसकी हालत खराब हो गई, तो उसे टेक्सास के एक अभयारण्य में रखा गया.

इंसानों से था खास लगाव

ओलिवर का झुकाव चिंपैंजियों से ज्यादा इंसानों की ओर था. उसे नारियल का शर्बत बेहद पसंद था. देखभाल करने वालों के अनुसार, अगर उसे कोई चीज़ पसंद नहीं आती थी तो वह कटोरा वापस कर देता था. जून 2012 में ओलिवर अपने देखभालकर्ता के झूले में शांत अवस्था में पाया गया. उसकी उम्र 55 साल थी. उसकी याद में उसी जगह एक खास खेल का मैदान बनाया गया, जिसे ‘ओलिवर का प्लेग्राउंड' नाम दिया गया.

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रहस्य आज भी कायम

ओलिवर भले ही इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी कहानी आज भी लोगों के मन में डर, जिज्ञासा और सवाल छोड़ जाती है. क्या वह सिर्फ एक अलग दिखने वाला चिंपैंजी था या प्रकृति का कोई अनोखा प्रयोग?

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