2000 साल बाद मिला सिकंदर महान का खोया हुआ शहर, ड्रोन सर्वे से हुआ बड़ा खुलासा, वैज्ञानिक भी हैरान

पुरातत्वविदों ने 2000 साल बाद सिकंदर महान के खोए हुए शहर टिगरिस नदी पर स्थित अलेक्जेंड्रिया का पता लगाया. जानिए इस ऐतिहासिक खोज से जुड़े अहम तथ्य.

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धरती के नीचे छिपा था सिकंदर का शहर, 2000 साल बाद ऐसे हुआ खुलासा

इतिहास से जुड़ी एक बड़ी खोज में पुरातत्वविदों ने उस प्राचीन शहर का पता लगा लिया है, जिसे महान शासक सिकंदर महान ने बसाया था. करीब 2000 सालों से यह शहर गायब था, लेकिन अब आधुनिक तकनीक की मदद से इसके अवशेष सामने आए हैं. इस खोज ने इतिहासकारों और वैज्ञानिकों को उत्साहित कर दिया है.

कहां मिला यह प्राचीन शहर

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्राचीन शहर ईराक के दक्षिणी हिस्से में फारस की खाड़ी के पास स्थित है. इसका नाम टाइग्रिस नदी पर स्थित अलेक्जेंड्रिया बताया जाता है, जो चौथी सदी ईसा पूर्व में एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर था. यह शहर व्यापार के लिए बेहद अहम था और भारत, मेसोपोटामिया और भूमध्यसागर के बीच संपर्क का प्रमुख केंद्र माना जाता था.

कैसे हुआ इस शहर का पता

पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों ने इस इलाके का अध्ययन ड्रोन इमेजिंग और आधुनिक भू-भौतिकीय तकनीकों से किया. इन तकनीकों की मदद से शहर की दीवारें, सड़कें और बड़े-बड़े हिस्से नक्शे पर स्पष्ट दिखाई देने लगे. इससे यह पुष्टि हुई कि यह वही प्राचीन शहर है जिसका जिक्र ऐतिहासिक दस्तावेजों में मिलता है.

क्या-क्या मिला खुदाई में

शोध के दौरान पुरातत्वविदों को कई अहम संरचनाएं मिलीं, जिनमें शामिल हैं:
- एक प्राचीन मंदिर परिसर
- भट्टियों और कार्यशालाओं के अवशेष
- शहर का बंदरगाह और नहर प्रणाली
- मजबूत किलेबंदी वाली दीवारें

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विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार बाढ़ आने के बावजूद इस शहर के अवशेष काफी अच्छी हालत में सुरक्षित हैं.

क्यों हुआ था शहर का पतन

इतिहासकारों के मुताबिक, तीसरी सदी के बाद इस शहर का महत्व धीरे-धीरे कम होने लगा. इसका मुख्य कारण टिगरिस नदी का मार्ग बदलना था, जिससे यह बंदरगाह के रूप में अपनी उपयोगिता खो बैठा.

सिकंदर ने खुद चुनी थी जगह

स्टीफ़न आर हाउज़र के अनुसार, प्राचीन स्रोतों से पता चलता है कि सिकंदर महान ने 324 ईसा पूर्व में खुद इस स्थान को शहर बसाने के लिए चुना था. यह जानकारी रोमन लेखक प्लिनी द एल्डर के लेखों पर आधारित है. सिकंदर इस जगह की रणनीतिक स्थिति से बेहद प्रभावित था, क्योंकि यह नदी और समुद्री मार्गों के संगम पर स्थित था.

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शहर का आकार भी था विशाल

वैज्ञानिकों के अनुसार यह शहर करीब 2.5 वर्ग मील में फैला हुआ था, जो उस समय के अन्य बड़े शहरों से भी बड़ा था. इसके ब्लॉक और संरचनाएं इतनी विशाल थीं कि यह अपने समय के प्रमुख शहरों से भी आगे था. 

मुश्किल हालात में हुआ शोध

इस परियोजना की शुरुआत 2016 में हुई थी. हालांकि इस इलाके में खुदाई करना आसान नहीं था. गर्मियों में तापमान 120°F (लगभग 49°C) से ऊपर चला जाता है. इलाके में प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या है. पहले सुरक्षा कारणों से शोध सीमित था. इसके बावजूद वैज्ञानिकों ने धीरे-धीरे इस शहर की असली तस्वीर दुनिया के सामने रखी.

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